डॉ. सुकांत मजूमदार ने एक्स पर टीएमसी नेता तपस रॉय की एक तस्वीर साझा की, जिसमे साथ में ललित झा भी दिखाई दे रहा है। फोटो शेयर कर मजूमदार ने लिखा कि लोकतंत्र के मंदिर पर हमले का मास्टरमाइंड ललित झा, लंबे समय से टीएमसी के तपस रॉय को जानता है। दोनों के बीच घनिष्ठ संबंध हैं।
संसद की सुरक्षा में चूक का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मामले में अब राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। भाजपा कभी टीएमसी पर निशाना साध रही है तो कभी टीएमसी भाजपा पर हमलावर हो रही है। बता दें, घटना के मास्टर माइंड ललित मोहन झा ने दिल्ली पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि झा के तार पश्चिम बंगाल से जुड़े हैं।
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भाजपा नेता ने टीएमसी नेता पर लगाए आरोप
इस बीच, पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रमुख डॉ. सुकांत मजूमदार ने एक्स पर तृणमूल कांग्रेस पर हमला किया। मजूमदार ने एक्स पर टीएमसी नेता तपस रॉय की एक तस्वीर साझा की, जिसमे साथ में ललित झा भी दिखाई दे रहा है। फोटो शेयर कर मजूमदार ने लिखा कि लोकतंत्र के मंदिर पर हमले का मास्टरमाइंड ललित झा, लंबे समय से टीएमसी के तपस रॉय को जानता है। दोनों के बीच घनिष्ठ संबंध हैं। क्या इतने सबूत काफी नहीं है। इसके अलावा, भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि पूरे मामले में अब तक कांग्रेस, सीपीआई (माओवादी) ही लिप्त थी। लेकिन अब टीएमसी भी आरोपियों से अछूती नहीं रही।
रॉय ने खारिज किया आरोप
मजूमदार द्वारा लगाए गए आरोपों पर तृणमूल ने भी पलटवार किया। मजूमदार के आरोपों को रॉय ने खारिज करते हुए कहा कि मैं एक जनप्रतिनिधि हूं। सैकड़ों लोग साथ में तस्वीर खिंचवाते हैं। हम सबको तो नहीं जानते न। भाजपा अब सिर्फ दोषारोपण कर असल मुद्दे से ध्यान भटकाना चाहती है।
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झा के पड़ोसियों से पूछताछ
इधर, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बंगाल में झा के पड़ोसी और जानकारों से संपर्क किया। झा के पड़ोसी और जानकार उसे टीवी पर देख हैरान हैं। वह इसलिए भी हैरत में हैं कि गुमसुम रहने वाला एक व्यक्ति ऐसा कैसे कर सकता है। स्पेशल सेल ने वहां के स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की। इस दौरान बुर्राबाजार इलाके के रवींद्र सारणी में चाय की दुकान चलाने वाले पापुन शॉ ने बताया कि झा एक शिक्षक था, जो दो साल पहले ही गांव से अचानक गायब हो गया था।
शॉ ने बताया कि ललित एक शिक्षक था। वह स्थानीय बच्चों को पढ़ाता था। कुछ वर्ष पहले ही वह हमारे मोहल्ले में आया था और अकेला ही रहता था। वह अपने में ही मस्त रहता था। लोगों से कम ही बात करता था। कभी-कभी मेरी दुकान पर ही चाय पीता था। लेकिन दो साल पहले वह अचानक यहां से चला गया, जिसके बाद से वह कभी नहीं लौटा। बड़ा बाजार इलाके के राजेश शुक्ला ने बताया कि वह बहुत कम लोगों से ही करता था। वह किराए के मकान पर ही बच्चों को पढ़ाता था। उसके पिता क्षेत्र में ही चौकीदारी करते थे। उसका एक भाई और है। दो वर्ष पहले उत्तर 24 परगना के बागुईआटी में उसाका ट्रांसफर हो गया था। वह बहुत अच्छा लड़का था। हमें भरोसा नहीं हो रहा कि वह ऐसा कर सकता है।