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कर्नाटक: दशहरा उद्घाटन में बानू मुश्ताक को बुलाने का मामला गरमाया; हाईकोर्ट पहुंचे प्रताप सिम्हा,रख दी ये मांग

Sat, 06 Sep 2025 07:33 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलूरू

सार

कर्नाटक के मैसूर में इस वर्ष दशहरा महोत्सव का उद्घाटन कौन करेगा, इस पर शुरू हुई यह बहस अब राज्य की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गई है। कांग्रेस कह रही है कि यह राज्य का सांस्कृतिक उत्सव है और इसमें सभी का स्वागत होना चाहिए। भाजपा का आरोप है कि सरकार हिंदू परंपरा और आस्था को आहत कर रही है। वहीं अब यह मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया है।
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बानू मुश्ताक और दशहरा उत्सव पर मैसूर महल - फोटो : X @RahulGandhi / ANI
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विस्तार
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कर्नाटक में इस बार मैसूर दशहरा महोत्सव (2025) की शुरुआत बुकर प्राइज विजेता और साहित्यकार बानू मुश्ताक से करवाने के राज्य सरकार के फैसले पर राजनीति गर्मा गई है। बानू मुश्ताक को लेकर भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच जहां आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। वहीं, अब यह मामला कर्नाटक हाईकोर्ट में भी पहुंच गया है। 

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भाजपा नेता प्रताप सिम्हा ने शनिवार को कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें उन्होंने राज्य सरकार की ओर से इस वर्ष के मैसूरु दशहरे के उद्घाटन के लिए अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक को आमंत्रित करने पर रोक लगाने की मांग की।

मैसूर जिला प्रशासन ने विपक्षी भाजपा समेत कुछ वर्गों की आपत्तियों के बावजूद बुधवार को मुश्ताक को आमंत्रित किया। पूर्व सांसद सिम्हा ने कांग्रेस सरकार पर पूर्व मैसूर राजपरिवार समेत प्रमुख हितधारकों से परामर्श किए बिना एकतरफा निर्णय लेने का आरोप लगाया। उन्होंने जनाक्रोश और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की आशंका का हवाला देते हुए हाईकोर्ट से मुश्ताक के निमंत्रण को वापस लेने के निर्देश जारी करने का अनुरोध किया।
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कर्नाटक सरकार का है यह रुख
इस पूरे विवाद पर कर्नाटक सरकार का कहना है कि यह एक राज्य उत्सव है और इसमें सभी को आमंत्रित किया जाएगा। गृह मंत्री जी परमेश्वर ने उन्होंने आगाह करते हुए कहा था कि इसमें धर्म को न लाया जाए। उन्होंने कहा कि अतीत में, निसार अहमद ने मैसूर में उत्सव का उद्घाटन किया था। मिर्जा इस्माइल मैसूर के दीवान थे। इसका विरोध करना उचित नहीं है। यह एक राजकीय उत्सव है। हमें इसमें धर्म को शामिल करने की जरूरत नहीं है। कई लोग इसे एक धार्मिक आयोजन मानते हैं, लेकिन यह एक राजकीय उत्सव है। आप इसमें धर्म को क्यों मिला रहे हैं? क्या इसे किसी एक समुदाय को छोड़कर आयोजित किया जाना चाहिए? चाहे वह किसी चीज में विश्वास करती हो या नहीं, यह एक राजकीय उत्सव है और हम सभी को आमंत्रित करेंगे।'

पूर्व में भी मुस्लिम हस्तियों को किया जा चुका आमंत्रित
गौरतलब है कि साल 2017 में भी प्रसिद्ध कवि और कन्नड़ लेखक के.एस.निसार अहमद ने मैसूर दशहरा उत्सव का उद्घाटन किया था। वाडियार ने कहा कि अब बानू मुश्ताक को बुलाकर उन्हें मना करना उनका अपमान होगा। ऐसे में मैं ये राज्य पर छोड़ता हूं कि वे इस पर क्या करते हैं या उनकी क्या प्रतिक्रिया होती है। 

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