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Violence: बंगाल में रामनवमी पर हुई हिंसा को लेकर BJP का ममता पर वार, कहा- हिंदुओं पर जानबूझकर किए जा रहे हमले

Mon, 01 May 2023 10:49 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कलकत्ता

सार

भारतीय जनता पार्टी के नेता दिलीप घोष ने रविवार को आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार इस मुद्दे को हल करने का प्रयास नहीं कर रही है।
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ममता बनर्जी और दिलीप घोष - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने एक बार फिर बंगाल में रामनवमी हिंसा को लेकर ममता बनर्जी पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बंगाल में जानबूझकर हिंदुओं पर हमले किए जा रहे हैं। वहीं घोष ने इस मामले में हाई कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले की भी सराहना की।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपी जांच

भारतीय जनता पार्टी के नेता दिलीप घोष ने रविवार को आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार इस मुद्दे को हल करने का प्रयास नहीं कर रही है। गौरतलब है, यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने रामनवमी समारोह के दौरान हावड़ा और दलखोला जिलों और पश्चिम बंगाल के अन्य हिस्सों में भड़की हिंसा की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपी है। इससे पहले भाजपा नेता ने बंगाल पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया था। 

इस मामले में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनाम की अगुवाई वाली एक पीठ ने राज्य पुलिस को आदेश दिया है कि वह मामले के कागजात केंद्र सरकार को सौंपे ताकि एनआईए अपनी जांच शुरू कर सके। 

शुवेंदु अधिकारी भी कर चुके हैं तारीफ

हाई कोर्ट द्वारा हिंसा की जांच पर लगातार सख्ती को देखकर भाजपा नेता शुवेंदु अधिकारी ने भी तारीफ की। उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय को संविधान का संरक्षक बताया। उन्होंने कहा कि संविधान के संरक्षक ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल में रामनवमी पर हुई हिंसा से संबंधित मामले की जांच को एनआईए को सौंप दी है। इसने जनता में विश्वास जगाया है। 

नेता ने याचिका दायर की थी

भाजपा विधायक व नेता प्रतिपक्ष शुवेंदु अधिकारी ने राज्य में रामनवमी पर हुई हिंसा की एनआइए जांच की  मांग करते हुए कोर्ट में याचिका दायर की थी। बता दें कि राज्य में कई जगहों पर रामनवमी पर निकली शोभायात्राओं पर हमला हुआ था। आगजनी, तोड़फोड़ व मारपीट की घटनाएं भी हुई थी।

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दो सप्ताह के भीतर दस्तावेज सौंपने के निर्देश
जनहित याचिका में अधिकारी ने हिंसा की एनआईए जांच की मांग करते हुए यह आरोप लगाया था कि कई इलाकों में बम विस्फोट भी हुए थे। अदालत ने राज्य पुलिस को दो सप्ताह के भीतर मामले से संबंधित सभी रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज केंद्र सरकार को स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। केंद्र को इसके बाद एनआईए को दस्तावेज भेजने का निर्देश दिया गया।

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