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JJP: कैसे बनी जजपा, क्यों हुआ था भाजपा के साथ गठबंधन, पार्टी टूटने की आशंका के बीच दुष्यंत का अगला कदम क्या?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Wed, 13 Mar 2024 04:39 PM IST

सार

BJP-JJP Alliance Break Up: जननायक जनता पार्टी का गठन 2018 में हुआ था। 2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में जजपा किंगमेकर बनी। 90 सीटों वाली विधानसभा में जजपा ने 10 सीटें जीती थीं।  
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जननायक जनता पार्टी - फोटो : AMAR UJALA
हरियाणा की राजनीति ने मंगलवार को करवट ले ली। जहां दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी (जजपा) ने एनडीए से अलग होने का फैसला किया। वहीं, भाजपा ने राज्य में अपना नेतृत्व परिवर्तन किया। मनोहरलाल खट्टर की जगह प्रदेश अध्यक्ष नायब सिंह सैनी हरियाणा के नए मुख्यंत्री बना दिए गए।

एनडीए से नाता तोड़ने के बाद जजपा में टूट की आशंका जताई जा रही है। बुधवार को नवगठित सरकार ने बहुमत परीक्षण पास कर लिया। इस दौरान खबरें हैं कि जजपा के कुछ विधायक बहुमत परीक्षण में शामिल हो गए जबकि पार्टी ने व्हिप जारी कर इससे दूर रहने को कहा था। 


इन घटनाक्रमों के बाद कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं। आइये जानते हैं कि जजपा का इतिहास क्या है? पार्टी एनडीए का हिस्सा कब बनी? भाजपा से राहें क्यों अलग हो गईं? पार्टी में टूट की आशंका क्यों जताई जा रही है? दुष्यंत चौटाला का अगला कदम क्या होगा?


 
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जननायक जनता पार्टी - फोटो : AMAR UJALA
हरियाणा की राजनीति ने मंगलवार को करवट ले ली। जहां दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी (जजपा) ने एनडीए से अलग होने का फैसला किया। वहीं, भाजपा ने राज्य में अपना नेतृत्व परिवर्तन किया। मनोहरलाल खट्टर की जगह प्रदेश अध्यक्ष नायब सिंह सैनी हरियाणा के नए मुख्यंत्री बना दिए गए।

एनडीए से नाता तोड़ने के बाद जजपा में टूट की आशंका जताई जा रही है। बुधवार को नवगठित सरकार ने बहुमत परीक्षण पास कर लिया। इस दौरान खबरें हैं कि जजपा के कुछ विधायक बहुमत परीक्षण में शामिल हो गए जबकि पार्टी ने व्हिप जारी कर इससे दूर रहने को कहा था। 

इन घटनाक्रमों के बाद कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं। आइये जानते हैं कि जजपा का इतिहास क्या है? पार्टी एनडीए का हिस्सा कब बनी? भाजपा से राहें क्यों अलग हो गईं? पार्टी में टूट की आशंका क्यों जताई जा रही है? दुष्यंत चौटाला का अगला कदम क्या होगा?


 

दुष्यंत चौटाला - फोटो : अमर उजाला
कैसे बनी जननायक जनता पार्टी?
जननायक जनता पार्टी का गठन 9 दिसंबर 2018 को हुआ था। दुष्यंत चौटाला ने इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) से अलग होकर नई पार्टी का गठन किया था। पार्टी के गठन की पीछे चौटाला परिवार की सियासी लड़ाई रही है। दरअसल, सांसद रह चुके दुष्यंत चौटाला चौधरी देवीलाल के परिवार से हैं। चौधरी देवीलाल के बेटे हैं ओमप्रकाश चौटाला। ओमप्रकाश चौटाला के दो बेटे हैं। अजय चौटाला और अभय चौटाला। अभय चौटाला से छिड़ी सियासी रार के बाद अजय चौटाला के बेटे दुष्यंत चौटाला ने जननायक जनता पार्टी का गठन किया था। 

हरियाणा विधानसभा - फोटो : अमर उजाला
विधानसभा चुनाव में जजपा बनी किंगमेकर 
दुष्यंत चौटाला के नेतृत्व में बनी जननायक जनता पार्टी ने अपना पहला औपचारिक चुनाव लोकसभा चुनावों के तौर पर लड़ा था। जजपा ने आम आदमी पार्टी ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। जजपा ने सात और आप ने तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। हालांकि, बीते लोकसभा चुनाव में जजपा को कामयाबी नहीं मिली। कुछ ही महीनों बाद हरियाणा में विधानसभा के चुनाव हुए। इस चुनाव में जननायक जनता पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया। पार्टी ने 90 में से 87 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे। जजपा के 10 उम्मीदवार जीतकर विधानसभा पहुंचे।

वहीं, सत्ताधारी भाजपा को नुकसान हुआ और वह बहुमत के आंकड़े से चूक गई। सभी 90 सीटों पर लड़ी भाजपा को 40 सीटों पर जीत मिली। विधानसभा में बहुमत के लिए 46 सीटों पर जीत जरूरी थी। ऐसे में भाजपा बहुमत के आंकड़े से छह सीटें कम जीत सकी। चुनाव के बाद 10 सीटों वाली जजपा के साथ भाजपा ने गठबंधन किया और राज्य की सत्ता में वापसी की। इस चुनाव में कांग्रेस ने 31 सीटें जीती थीं और यह मुख्य विपक्षी पार्टी बनी। सात निर्दलीय, इनेलो एक और हरियाणा लोकहित पार्टी को एक सीट पर जीत मिली थी। भाजपा-जजपा सरकार के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर बने। वहीं, जजपा की तरफ से दुष्यंत चौटाला राज्य के उप-मुख्यमंत्री बने।

मनोहर लाल और दुष्यंत चौटाला - फोटो : फाइल
भाजपा-जजपा गठबंधन क्यों टूटा?
आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा और जजपा के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत चल रही थी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और जजपा नेता दुष्यंत चौटाला के बीच सीट बंटवारे को लेकर सोमवार को 45 मिनट बातचीत हुई। कहा जा रहा है कि बैठक में जजपा ने भिवानी-महेंद्रगढ़ और हिसार लोकसभा सीट की मांग की थी। हिसार सीट पर कांग्रेस से भाजपा में आए कुलदीप बिश्नोई भी दावेदारी पेश कर रहे हैं। ऐसे में भाजपा यह सीट जजपा को देने के पक्ष में नहीं थी। वहीं, भिवानी सीट पर भी भाजपा खुद को मजबूत मान रही है। यह सीट भी पार्टी जजपा को देने के पक्ष में नहीं थी। चर्चा के मुताबिक जजपा की दो सीटों की मांग पर भाजपा केवल एक सीट देने को तैयार थी। सूत्रों के मुताबिक भाजपा की ओर से जजपा को कुरुक्षेत्र सीट ऑफर की गई थी। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत पटरी से उतर गई। दरअसल, 10 लोकसभा सीटों वाले इस राज्य में भाजपा को 2019 में सभी 10 सीटों पर जीत मिली थी। ऐसे में पार्टी किसी और दल को बहुत अधिक सीटें देने के पक्ष में नहीं थी। 

इसके अलावा 2019 में गठबंधन बनने के बाद से कई बार भाजपा-जजपा के बीच मतभेद के संकेत मिलते रहे हैं। पिछले साल नूंह में हिंसा के लिए तत्कालीन उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने आयोजकों को ही जिम्मेदार ठहराया था। चौटाला का कहना था कि आयोजकों ने जिला प्रशासन को भीड़ को लेकर पूरी जानकारी नहीं दी, उसकी वजह से ही यह घटना हुई है। मोनू मानेसर का नाम लिए बगैर दुष्यंत ने यह भी कहा था कि अराजक तत्व के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, उसका किसी पार्टी से जुड़ाव न देखा जाए।

2024 लोकसभा चुनावों के लिए जजपा की योजनाओं ने यह संकेत दिया था कि गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं है। इससे पहले भाजपा नेता और गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले साल सिरसा में एक रैली में कहा था कि हरियाणा की सभी 10 सीटों पर कमल खिलाना है। इसके बाद दुष्यंत ने कहा था कि जजपा सभी 10 लोकसभा सीटों पर भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।

पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला - फोटो : अमर उजाला
क्या जजपा में टूट का डर?
हरियाणा में मंगलवार को नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में नई सरकार बनी। बुधवार को विधानसभा के एक दिवसीय सत्र में सरकार का बहुमत परीक्षण हुआ। सदन में रखे गए विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान जजपा के कुछ विधायक भी आए गए। जबकि पार्टी की ओर से व्हिप जारी करके विधायकों को बहुमत परीक्षण से अनुपस्थित रहने को कहा गया था। हालांकि, सदन में विश्वास मत की वोटिंग से पहले जजपा विधायक जोगीराम सिहाग, देवेंद्र बबली, रामकुमार गौतम, रामनिवास सूरजाखेड़ा, ईश्वर सिंह भी बाहर चले गए। 

रैली में पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला - फोटो : अमर उजाला
दुष्यंत चौटाला का अगला कदम क्या होगा?
सबकी निगाहें दुष्यंत चौटाला के अगले कदम पर हैं। यह भी दिलचस्प है कि इतना सब कुछ हुआ लेकिन भाजपा-जजपा ने आधिकारिक रूप से गठबंधन तोड़ने का एलान नहीं किया। एक एक्स पोस्ट में दुष्यंत ने हरियाणा के उपमुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा करने का अवसर देने के लिए हरियाणा की जनता का आभार प्रकट किया। इसके साथ ही उन्होंने जनता से अपने संदेश में कहा, 'मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि जननायक चौधरी देवीलाल जी के कदमों पर चलते हुए, मैं हरियाणा और हरियाणा के लोगों के हितों की रक्षा के लिए सदैव समर्पित रहूंगा। हरियाणा के लोगों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के हमारे प्रयास लगातार जारी रहेंगे।'

वहीं, दुष्यंत ने नई सरकार के गठन पर नायब सैनी को बधाई देते हुए कहा, 'मुझे पूरा विश्वास है कि गरीब, किसान के कल्याण और प्रदेश के विकास की जिन योजनाओं को हमने लागू किया, आप उन्हें आगे बढ़ाते हुए जन-हितैषी सरकार चलाएंगे।'

मौजूदा परिस्थिति को देखें तो दुष्यंत चौटाला के सामने कई चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी चुनौती तो यह है कि जजपा अपने विधायकों को एकजुट रखे। क्योंकि जजपा के चार से पांच विधायक दुष्यंत चौटाला के द्वारा बुलाई गई पार्टी की एक अहम बैठक में शामिल नहीं हुए थे। ये विधायक भाजपा नेता नायब सैनी के शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद थे।

गठबंधन के भविष्य को लेकर जजपा के हरियाणा अध्यक्ष निशान सिंह ने प्रतिक्रिया दी है। निशान सिंह ने कहा, 'डॉ. अजय सिंह चौटाला की अध्यक्षता में पार्टी की एक बैठक हुई बैठक में सभी मुद्दों पर चर्चा हुई। यह निर्णय लिया गया कि बुधवार को हिसार में संकल्प रैली आयोजित की जाएगी। पार्टी जो भी निर्णय लेगी उसकी जानकारी रैली में दी जायेगी।'
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