आज कर्नाटक विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव आयोग ने तारीख का ऐलान कर दिया। चुनाव आयोग जिस समय तारीख का ऐलान कर रहा था उसी समय बीजेपी के आईटी हेड अमित मालवीय ने एक ट्वीट किया जिसकी वजह से हंगामा हो गया।
चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस चल रही थी। मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत कर्नाटक विधानसभा चुनावों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दे रहे थे। उन्होंने चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं किया था। तभी अमित मालवीय का ट्वीट सामने आया जिसमें कर्नाटक विधानसभा चुनावों की तारीखों की जानकारी दी गई थी।
हालांकि विवाद बढ़ने के बाद अमित मालवीय ने ट्वीट डिलीट कर दिया। उनके ट्वीट में मतगणना की तारीख सही नहीं निकली। आपको बता दें कि EC के मुताबिक कर्नाटक विधानसभा चुनावों में 12 मई को मतदान होगा वहीं 15 मई को मतगणना होगी। वहीं अमित ने अपने ट्वीट में लिखा कि चुनाव 12 मई को होंगे और मतगणना 18 मई को होगी।
अमित मालवीय के ट्वीट से सियासी गलियारों में हंगामा मच गया। सवाल यह उठ रहे हैं कि चुनाव आयोग से पहले अमित मालवीय को कर्नाटक में मतदान और मतगणना की तारीखों के बारे में कैसे पता चला। जब चुनाव आयुक्त ओपी रावत से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच करवायी जायेगी।
केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की अगुआई में बीजेपी नेताओं ने चुनाव आयोग से मुलाकात की। चुनाव आयोग से अधिकारियों से मुलाकात के बाद नकवी ने बताया कि अमित मालवीय का ट्वीट एक टीवी चैनल के स्रोत पर आधारित थी। इसका चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का कोई इरादा नहीं था। कर्नाटक के एक कांग्रेस नेता ने भी यही बात कही थी। नकवी ने कहा कि हम सहमत हैं कि (मालवीय) को यह ट्वीट नहीं करना चाहिए।
वहीं कांग्रेस ने इस मुद्दे पर बीजेपी पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा ने चुनाव आयोग से पहले ही कर्नाटक के चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या संवैधानिक संस्थाओं का डाटा भी भाजपा चुरा रही है? उन्होंने दूसरा सवाल पूछते हुए कहा कि क्या चुनाव आयोग श्री अमित शाह को नोटिस देगा और भाजपा के IT सेल पर FIR दर्ज करवाएगा?
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस मुद्दे पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अमित मालवीय ने चुनाव आयोग से पहले कर्नाटक चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया, इसका मतलब है कि बीजेपी चुनाव तारीखों के मामले में चुनाव आयोग को हुक्म दे रही है। उन्होंने कहा कि वह आशा रखते थे कि चुनाव आयोग संविधान के अनुसार काम करता है और जानकारियों को लीक नहीं होने देगा। ऐसी चीजें पहले कभी नहीं हुईं।