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उपचुनावों में मिली हार के बाद सीएम वसुंधरा नहीं परनामी पर गिर सकती है गाज

Wed, 07 Feb 2018 02:48 AM IST
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह/फाइल फोटो
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राजस्थान में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तीन सीटों पर हुए उपचुनावों में मिली करारी हार के बाद सीएम वसुंधरा राजे के विरोधी गुट ने उनके खिलाफ पूरी तरह मोर्चा खोल रखा है बावजूद पार्टी शीर्ष नेतृत्व राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के मूड में नहीं है। हालांकि सूत्रों की मानें तो दोनों गुटों में तालमेल बिठाने को लेकर संगठन के मुखिया अशोक परनामी की बलि ली जा सकती है।

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दरअसल, राजस्थान में राजे विरोधी गुट के एक भी नेता का कद सीएम वसुंधरा के आसपास नहीं ठहरता है। अपने इस सियासी कद का प्रदर्शन वसुंधरा ने साल 2008 के विधानसभा चुनाव में तब कराया था जब पार्टी के कई नेता और संघ से जुड़े कुछ संगठनों के भीतरी विरोध के बावजूद वह अपने बलबूते बहुमत के आंकड़े से मामूली अंतर से चूक गई थीं। 

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि राजस्थान में वसुंधरा के खिलाफ कार्रवाई करने से भाजपा के लिए हालात और खराब होंगे। चूंकि राजस्थान में इसी साल विधानसभा चुनाव हैं, ऐसे में पार्टी नेतृत्व इस मामले में कोई जोखिम नहीं मोल लेना चाहता। हालांकि शीर्ष नेतृत्व राज्य के दोनों गुटों के बीच संतुलन साधने का फार्मूला तलाश रहा है। यही वजह है कि निकट भविष्य में संगठन स्तर पर व्यापक परिवर्तन की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, वसुंधरा विरोधी गुट को संगठन की कमान भी सौंपी जा सकती है।
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इसलिए चिंतित है नेतृत्व
चूंकि राजस्थान में साल के अंत तक मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ के साथ विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके कुछ महीने बाद ही देश में लोकसभा चुनाव भी होंगे। ऐसे में यदि इन राज्यों में पार्टी का प्रदर्शन बेहतर नहीं रहा तो इसका असर लोकसभा चुनाव पर पड़ेगा।  

आपसी खींचतान भी बनी हार की वजह
पार्टी सूत्रों का यह भी मानना है कि उपचुनाव में खराब नतीजों की बड़ी वजह फिल्म ‘पद्मावत’ विवाद रहा। इसके अलावा राज्य में वसुंधरा और घनश्याम तिवाड़ी गुट की आपसी खींचतान भी हार की वजह बनी।

तब भी वसुंधरा का कद आया था आड़े
मुख्यमंत्री बनने के बाद वसुंधरा राजे आईपीएल विवाद के कारण पार्टी के भीतर चौतरफा घिर गई थीं। तब भी राजस्थान में उनके कद का कोई दूसरा बड़ा नेता नहीं होने की वजह से उनकी कुर्सी पर आंच नहीं आई थी।

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