बंगाल में भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी। साम-दाम-दंड-भेद की नीति अपनाई। यहां तक कि टीएमसी के दिग्गज नेताओं को भी अपने पाले में खींच लिया। इसके बाद भाजपा के हर नेता ने 200 सीटें जीतने के दावे किए। दरअसल, भाजपा ने बंगाल के राजनीतिक रण में 'कमल' खिलाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन दलबदलुओं के सहारे भी उसकी नैया पार नहीं लग सकी। क्या रही इसकी वजह? क्यों टीएमसी के दिग्गज भाजपा के 'सारथी' नहीं बन सके, जानते हैं इस रिपोर्ट में...
ये चल रहे आगे
चुनाव आयोग की ओर से मिल रहे रुझानों के अनुसार, टीएमसी को छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले सुवेंदु अधिकारी नंदीग्राम में आगे चल रहे हैं। इनके अलावा नाटाबारी सीट पर मिहिर गोस्वामी, हल्दिया सीट पर तापसी मंडल, मान्टेश्वर सीट पर सैकत पांजा, मोयना में अशोक डिंडा और कृष्णानगर उत्तर विधानसभा सीट पर मुकुल रॉय आगे चल रहे हैं।
ये चल रहे पीछे
चुनाव आयोग की ओर से मिल रहे रुझानों के अनुसार खारडाह सीट पर शीलभद्र दत्ता पीछे हैं। वहीं जगतदल सीट पर अरिंदम भट्टाचार्या, डोमजुर सीट पर राजीव बनर्जी, पुरुलिया सीट पर सुदीप मुखर्जी और काल्ना सीट पर बिस्वजीत कुंडू पीछे चल रहे हैं।
इन रुझानों पर गौर करें दल बदलकर भाजपा में जाने वाले छह नेता जहां अपनी सीट पर आगे चल रहे हैं वहीं पांच नेता पीछे चल रहे हैं। यदि ये रुझान अंतिम परिणाम में तब्दील हो जाते हैं तो साफ है कि भाजपा तमाम तिकड़मों के बावजूद भी अपने अभियान को आगे बढ़ाने में कामयाब नहीं हो पाई।
इन नेताओं ने छोड़ा था टीएमसी का दामन
जानकारी के मुताबिक, बीते करीब दो सालों में टीएमसी के करीब छह सांसद और 14 विधायकों ने पार्टी छोड़ी है। दल बदलने वाले इन नेताओं में सुवेंदु अधिकारी और शीलभद्र दत्ता आदि दिग्गज नेता शामिल थे, जो भाजपा में चले गए। इनमें सांसद सुनील मंडल के अलावा मिहिर गोस्वामी, अरिंदम भट्टाचार्या, राजीव बनर्जी, तापसी मंडल, सुदीप मुखर्जी, सैकत पांजा, अशोक डिंडा, दीपाली बिस्वास, शुक्र मुंडा, श्यांपदा मुखर्जी, बनश्री मैती और बिस्वजीत कुंडू भी शामिल हैं।
2019 से शुरू हुआ दल बदलने का सिलसिला
पश्चिम बंगाल में तृणमूल के दिग्गज नेताओं के भगवा रंग में रंगने की शुरुआत साल 2019 के लोकसभा चुनाव से चंद महीने पहले शुरू हुई थी। सबसे पहले मुकुल रॉय ने भाजपा का दामन थामा था और उसके बाद अनुपम हाजरा, सौमित्र खान आदि सांसद भाजपा में शामिल हो गए थे। इस बीच विधायक अर्जुन सिंह भी भाजपाई बने और उसका इनाम लोकसभा चुनाव में बतौर सांसद मिला।
इन सांसदों ने भी दिया इस्तीफा
गौरतलब है कि पूर्व रेल मंत्री और टीएमसी सांसद दिनेश त्रिवेदी ने 12 फरवरी को राज्यसभा में इस्तीफा देकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर खलबली मचा दी थी। इसे विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा था। बता दें कि इस्तीफा देते वक्त दिनेश त्रिवेदी ने कहा था कि उन्हें टीएमसी में रहते हुए घुटन हो रही थी। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ भी की थी। उनके अलावा टीएमसी नेता एवं अभिनेता मिथुन भी राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हुए, हालांकि पार्टी ने उन्हें इस बार के चुनावी मैदान में नहीं उतारा।