सार
पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा मुस्लिम मतदाताओं को साधने की रणनीति बना रही है। अल्पसंख्यक मोर्चा परिवारों से संपर्क करेगा और घुसपैठ विरोधी अभियान को बाहरी लोगों के खिलाफ बताएगा। वहीं टीएमसी, एआईएमआईएम और अन्य दल भी अल्पसंख्यक वोटों के लिए सक्रिय हैं।
पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा मुसलमान मतदाताओं को लुभाने की कोशिश करेगी। पार्टी का प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चा अगले एक महीने के अंदर हर विधानसभा सीट के अल्पसंख्यक परिवारों से संपर्क कर उन्हें भाजपा सरकारों के शासन में अल्पसंख्यकों के हुए विकास के बारे में बताएगी। पार्टी का लक्ष्य है कि वह पश्चिम बंगाल के इस विधानसभा चुनाव में अल्पसंख्यक मतदाताओं के पांच फीसदी से अधिक वोट हासिल कर सके। अभी एक से दो फीसदी मुस्लिम मतदाता भाजपा को वोट करते हैं।
भाजपा पश्चिम बंगाल में लगातार घुसपैठ का मुद्दा उठा रही है। पार्टी के बड़े नेता आरोप लगा रहे हैं कि घुसपैठिये स्थानीय लोगों के रोजी-रोटी के अधिकार को छीन रहे हैं। टीएमसी नेता ममता बनर्जी भाजपा के इन मुद्दों को स्थानीय मुसलमानों के खिलाफ बताने की कोशिश कर रही हैं। इसके बीच भाजपा मुसलमान मतदाताओं का भरोसा जीतने की कोशिश करेगी और उन्हें बताएगी कि उसका अभियान केवल घुसपैठिये बाहरी लोगों के विरुद्ध है।
पार्टी ने लगातार पसमांदा मुसलमानों का मुद्दा उठाकर उनका समर्थन हासिल करने की कोशिश की है। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे हैदराबाद में हुई पार्टी की बैठक में उठाकर मुसलमानों के करीब जाने का संकेत दिया था। राज्य के कुल मतदाताओं में 27 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाले मुस्लिम मतदाता राज्य की 120 सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं, जबकि शेष सीटों पर भी वे चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। यदि पार्टी इसमें से कुछ हिस्सा भी अपनी तरफ खींचने में सफल होती है तो यह उसके लिए बोनस जैसा होगा।
कोलकाता में हुई बड़ी बैठक
भाजपा सांसद और पश्चिम बंगाल के प्रदेश अध्यक्ष सौमिक भट्टाचार्य की उपस्थिति में पार्टी ने शनिवार को कोलकाता के माहेश्वरी सदन में अल्पसंख्यकों की एक बड़ी बैठक की। पूरे प्रदेश से आए अल्पसंख्यक वर्ग के नेताओं की इस बैठक में यह लक्ष्य तय किया गया कि पार्टी मुसलमान बहुल सीटों के साथ-साथ राज्य की सभी विधानसभा सीटों पर अल्पसंख्यक परिवारों से संपर्क करेगी। राज्य में अल्पसंख्यक वर्ग में मुसलमान मतदाता प्रमुख हैं, लेकिन अल्पसंख्यक मोर्चा सिख, जैन और ईसाई परिवारों से भी संपर्क कर उन्हें अपने साथ जोड़ने की कोशिश करेगा। सौमिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि मुसलमान मतदाता परंपरागत रूप से अभी तक भाजपा को बहुत कम वोट देते रहे हैं, लेकिन नई परिस्थितियों में पार्टी उनका भरोसा जीतने की कोशिश करेगी।
ममता बनर्जी के अलावा टीएमसी के बागी नेता हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी इन चुनावों में मुसलमान मतदाताओं के बड़े दावेदार के तौर पर उभरी है। एआईएमआईएम भी पश्चिम बंगाल में इस बार पूरी मजबूती के साथ उतरने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा कांग्रेस और वाम दल भी अल्पसंख्यक वोटों के बड़े दावेदार हैं।
'हुमायूं ममता के डर की ताबीज'
हुमायूं कबीर ममता बनर्जी के हार की डर की ताबीज हैं। ममता दीदी ने एक साजिश के तहत हुमायूं कबीर को अलग दल के रूप में खड़ा किया है जिससे उनसे नाराज मुसलमान मतदाता हुमायूं कबीर की ओर चले जाएं और चुनाव के बाद वे उन्हें अपने साथ ले सकें। लेकिन दीदी का डर खत्म नहीं होगा। प. बंगाल से टीएमसी बाहर जाएगी, और भाजपा सरकार बनाएगी।