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Analysis: भाजपा ने चल दिया है हिंदुत्व का दोहरा दांव

Sat, 18 Mar 2017 08:02 PM IST
विनोद अग्निहोत्री- Presented By: अनंत पालीवाल
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यूपी में योगी आदित्यनाथ को सीएम बनाकर के भाजपा ने दोहरा दांव चला है। योगी के जरिए भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि यूपी में हिंदुत्व का एजेंडा आक्रामक तरीके से चला जाएगा। योगी न सिर्फ भाजपा के एमपी है, ब्लकि वो उन महंत अवैद्यनाथ के उत्तराधिकारी भी हैं, जिन्होने अयोध्या में विवादास्पद स्थल पर राम मंदिर आंदोलन की नींव रखी थी। 
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योगी आदित्यनाथ संघ परिवार के उग्र हिंदुत्व का सबसे बड़ा चेहरा हैं। सीएम के पद उनकी नियुक्ति से साफ हो गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास के एजेंडे पर संघ का एजेंडा भारी पड़ा है। एक तरफ चुनाव नतीजों के बाद भाजपा मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मोदी ने 2019 के लिए न्यू इंडिया का नारा दिया था, लेकिन उत्तराखंड में संघ के पूर्व प्रचारक त्रिवेंद्र रावत और यूपी में गोरखपुर मठ के महंत योगी आदित्यनाथ को सीएम बनाकर के संघ ने संकेत दे दिया है कि 2019 के चुनाव में भी भाजपा हिंदुत्व का एजेंडा लेकर के आगे बढ़ेगी।

जातीय समीकरण के हिसाब से योगी राजपूत हैं और उन्हें सीएम बनाकर के भाजपा अपने सवर्ण वोट को एकजुट बनाए रखने की कोशिश करेगी। साथ ही योगी का हिंदुत्ववादी चेहरा उनके पीछे हिंदु समाज को अन्य वर्गों को जोड़े रखने में किस हद तक कामयाब होंगे, यह एक बड़ी चुनौती हैं। 
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अपने मुस्लिम विरोधी बयानों के लिए जाने जाने वाले योगी आदित्यनाथ एक ऐसे प्रदेश के सीएम बन रहे हैं, जिसकी 20 फीसदी आबादी मुसलमानों की है। इसलिए भाजपा के सामने पीएम के सबका साथ-सबका विकास के नारे को अमल में लाने के लिए जिम्मेदारी भी योगी के कंधों पर होगी। यूपी के तमाम सामाजिक और क्षेत्रिय अंतर विरोधों को देखते हुए योगी का चयन एक ऐसी दुधारी तलवार साबित हो सकता है, जो अगर सही चली तो राजनीतिक विरोधियों पर भारी पड़ेगी और अगर गलत चली तो 2019 का मैदान हाथ से निकलने का खतरा भी हो सकता है। योगी की नियुक्ति से भाजपा ने यूपी के पूर्वांचल इलाके में अपनी मजबूत पैठ बनाने का द्वार भी खुला है। 
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