सीबीआई में निदेशक और विशेष निदेशक के बीच छिड़ी रार का छींटा सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय की छवि पर भी आ सकता है। सीबीआई निदेशक की नियुक्ति प्रधानमंत्री, देश के प्रधानमंत्री न्यायाधीश और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के कोलेजियम से होती है।
इसी तरह से सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बारे में कहा जाता है कि वह प्रधानमंत्री के लगातार भरोसेमंद रहे हैं। गोधरा में 2002 में साबरमती एक्सप्रेस में लगी आग की जांच के लिए गठित एसआईटी का नेतृत्व करने वाले राकेश अस्थाना ने प्रधानमंत्री के मुख्यमंत्रित्व काल में लगातार अच्छी पोस्टिंग पाई है।
राकेश अस्थाना पर लगातार एक के बाद एक कई आरोप भी लगे हैं। उनकी नियुक्ति के समय ही वकील प्रशांत भूषण ने उनकी तैनाती का विरोध किया था। फरवरी 2017 में आलोक वर्मा ने भी उनकी दागदार छवि का हवाला देकर आपत्ति जताई थी।
सीबीआई निदेशक और सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर के बीच में यह झगड़ा करीब साल भर से सतह पर है, इसके बाद भी पीएमओ चुप रहा फिर अचानक जिस तरह आधी रात को आनन-फानन में कार्रवाई की गई और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया, उसने भी विपक्ष को पीएमओ पर हमला करने का मौका दे दिया है।