कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक बार फिर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे आरोप-प्रत्यारोप का दौर बढ़ गया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित जाति के लिए आंतरिक आरक्षण की समीक्षा की उच्च स्तरीय जांच समिति सिर्फ दलित समुदाय को गुमराह करने की एक चाल लगती है। भाजपा को असल में कोई चिंता नहीं है।
आरक्षण को शीघ्र लागू करना चाहिए
कर्नाटक सीएम सिद्धारमैया ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा कि केंद्र सरकार ने कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। क्योंकि अगर केंद्र सरकार सच में अनुसूचित जातियों के लिए आंतरिक आरक्षण की मांगों को पूरा करने का इरादा रखती है, तो उन्हें संसद में संविधान की धारा 341 में संशोधन करने के लिए एक विधेयक पेश करना चाहिए। विधेयक पास होने के बाद आरक्षण को शीघ्र लागू करना चाहिए।
बता दें, आंध्र प्रदेश में अनुसूचित जातियों के उप-वर्गीकरण का अध्ययन करने वाले राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने भी कहा था कि इसके लिए एक और उच्च स्तरीय समिति की आखिर आवश्यकता क्या है। यह केवल समय बर्बाद करने की एक रणनीति लगती है।
संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता होती है
उन्होंने बताया कि संविधान की धारा 341 (1) और (2) के अनुसार, अनुसूचित जाति की सूची में किसी भी जाति को जोड़ने या हटाने के लिए संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता होती है। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री ए नारायणस्वामी ने 26 जुलाई 2023 को राज्यसभा में इस संबंध में जानकारी दी थी। यह जवाब उन्होंने भाजपा सासंद जीवीएल नरसिम्हाराव के सवाल पर दिया था।
कांग्रेस पर झूठे आरोप
सिद्धारमैया ने कहा कि राज्य में भाजपा की सरकार थी। भाजपा नेता संविधान की धारा 341 में संशोधन करने और अनुसूचित जाति के लिए आंतरिक आरक्षण की दशकों पुरानी मांग को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव डालने के बजाय कांग्रेस पर झूठे आरोप लगा रहे हैं।