भाजपा नेतृत्व के थोक में सांसदों के टिकट काटने के फैसले ने न सिर्फ सत्ता विरोधी लहर को थामा, बल्कि पार्टी के ब्रांड मोदी को और मजबूत बना दिया। पार्टी ने जिन 91 सीटों पर नए चेहरे उतारे उनमें 79 सीटों पर जीत हासिल हुई। इनमें 8 सीटों से जुड़े सांसदों में से कुछ ने खुद चुनाव न लडऩे की इच्छा जताई तो कुछ ने ऐन चुनाव के समय पार्टी बदल ली। गौरतलब है कि पीएम मोदी ने बतौर सीएम अपने गृह प्रदेश गुजरात में सत्ता विरोधी लहर को थामने के लिए हर विधानसभा में थोक में टिकट काटे थे।
पार्टी ने इस चुनाव में यूपी के 19 सांसदों का टिकट काटा था। इसके अतिरिक्त पार्टी ने सावित्री बाई फूले और श्यामाचरण गुप्ता के पाला बदलने के बाद नए चेहरे का मौका दिया था। पार्टी हालांकि यूपी में सहयोगी के साथ 80 से 73 सीटें जीतने में कामयाब नहीं हुई। मगर पार्टी ने ऐसी 21 में से 15 सीटें दोबारा जीतने में सफलता हासिल की।
बीते साल के अंत में राज्य में कांग्रेस के हाथों करारी शिकस्त के बाद पार्टी ने राज्य के सभी 10 सांसदों का टिकट काट दिया था। पार्टी की यह तरकीब काम आई और जिस सूबे में कांग्रेस को तीन चौथाई सीटें मिली थी, वहां उसे महज तीन सीटों से ही संतोष करना पड़ा। पार्टी ने ऐसा ही प्रयोग दो वर्ष पूर्व दिल्ली निकाय चुनाव में किया था। पार्टी ने तब सभी वर्तमान पार्षदों के टिकट काट कर तीनों निगमों में बहुमत हासिल किया था।