भाजपा का बिहार में अपने सहयोगी दल लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के साथ सीटों के बंटवारे पर समझौता हो गया है। राज्य में लोजपा के पांच लोक सभा सीटों पर यूपी या झारखंड में एक लोकसभा सीच पर चुनाव लड़ने की उम्मीद है वहीं पार्टी के अध्यक्ष राम विलास पासवान को राज्य सभा भेजा जा सकता है। उच्च पदस्थ सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस आशय की घोषणा आज की जा सकती है।
पासवान ने अपने बेटे चिराग पासवान के साथ शुक्रवार को भाजपा नेता अरुण जेटली से मुलाकात की जिसके बाद यह समझौता हुआ। पासवान के पुत्र चिराग ने संवाददाताओं को बताया कि बातचीत जारी है और दावा किया कि सीट बंटवारे के अलावा अन्य मुद्दे भी हैं। लोकसभा सदस्य चिराग पासवान भाजपा के साथ अपनी पार्टी के मतभेदों को सामने रखने में काफी मुखर रहे हैं।
लोजपा के एक अन्य नेता ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि बातचीत सकारात्मक रही है और उन्हें जल्द समाधान होने की उम्मीद है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इससे पहले घोषणा की थी कि उनकी पार्टी एवं जदयू राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बिहार में बराबर संख्या में सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। बिहार में भाजपा नीत राजग ने 2014 के आम चुनाव में 31 सीटें जीती थीं।
भाजपा की ओर से लोजपा के साथ बातचीत के लिए जेटली को लगाये जाने से पासवान की पार्टी के साथ गठबंधन जारी रखने को भाजपा द्वारा दिया जाने वाला महत्व रेखांकित होता है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और जेटली सहित पार्टी के शीर्ष नेताओं ने लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान और उनके पुत्र के साथ गुरुवार को एक घंटे की मुलाकात की ताकि उनके मतभेदों को दूर किया जा सके।
चिराग पासवान ने इससे पहले जेटली को पत्र लिखकर यह समझाने के लिए कहा था कि नोटबंदी से देश को क्या लाभ हुए। उन्होंने यह भी ट्वीट किया था कि सीट बंटवारे की घोषणा में देरी से सत्ताधारी गठबंधन को नुकसान हो सकता है।
शाह-नीतीश की बैठक के बाद ही साफ होगी तस्वीर
भले ही शुक्रवार को लोजपा सांसद रामचंद्र पासवान ने राजग में बने रहने की घोषणा की, मगर स्थिति अभी साफ नहीं है। लोजपा सूत्रों का कहना है कि नए प्रस्ताव पर पार्टी में अभी मंथन होना है। शाह और नीतीश के साथ होने वाली बैठक के बाद ही सही तस्वीर सामने आएगी। वैसे चिराग के भाजपा पर हमलों को फिलहाल दबाव की राजनीति के रूप में देखा जा रहा है। मगर लोजपा अध्यक्ष पासवान ने जिस प्रकार अचानक बदलने की अब तक राजनीति की है, उससे मौजूदा सियासी परिस्थिति राजग के अनुकूल नहीं है।