पूर्वोत्तर भारत का द्वार कहे जाने वाले असम में पहली दफा भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बनने के आसार हैं, लेकिन असम में भाजपा का झंडा बुलंद करने में देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश का रोल भी अहम है। असम में भाजपा का झंडा यूपी बुलंद कर रहा है।
अगर असम में भाजपा की जीत हुई, तो पार्टी को रजत सेठी के रूप में चुनाव प्रबंधन के गुरु प्रशांत किशोर की काट भी मिल जाएगी। परदे के पीछे रहकर असम में भाजपा के चुनाव प्रचार की कमान संभाल रहे सेठी मूल रूप से यूपी के कानपुर से हैं, तो राज्य भाजपा के प्रभारी महेंद्र सिंह यूपी के प्रतापगढ़ से हैं।
प्रदेश की सियासत और अपना घरबार छोड़ कर वे बीते 18 माह से असम में भाजपा की जडे़ मजबूत बनाने में जुटे हैं। एक बूथ पर 20 यूथ का नारा यहां हकीकत में बदलने में उनकी अहम भूमिका है।
कानपुर में जन्मे सेठी विश्व बैंक सरीखे संस्था की नौकरी छोड़कर चुनावी रणनीति बनाने में जुटे हैं। उनके नेतृत्व में करीब 20 प्रोफेशनल युवाओं की एक टीम बीते छह माह से असम में जुटी हुई है, जो सोशल मीडिया से लेकर रियल मीडिया तक के लिए भाजपा के प्रचार की कमान संभाल रही है। इस टीम में अधिकांश युवा आईआईटी से इंजीनियरिंग में स्नातक एवं उच्च डिग्री धारक हैं।
चुनाव प्रबंधन गुरु प्रशांत किशोर के काट के रूप में देखे जा रहे रजत सेठी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई कानपुर में करने के बाद आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग में स्नातक किया। अमेरिका से उन्होंने इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री की। इसके बाद उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से लोक प्रशासन मेें भी डिग्री हासिल की। यही नहीं, उन्होंने यूएस के जाने-माने संस्थान जॉन एफ केनेडी से लीडरशिप विषय का गहराई से अध्ययन किया।
अमर उजाला से बातचीत में सेठी ने बताया कि उन्होंने बीते एक साल में असम के पूरे आंकड़ों का अध्ययन किया और पिछले छह माह से उनकी टीम असम में जमीनी स्तर पर कार्य कर रही है। शुरू में उन्होंने प्रदेश के 25 हजार बूथ के आंकड़ों का अध्ययन किया। इससे रणनीति बनाने में सफलता हासिल हुई।
बताया जा रहा है कि बूथ कमेटी के गठन और महागठबंधन बनाने का सूत्र भी इस आंकड़ों के माइक्रो अध्ययन से ही निकला था। असम गण परिषद के साथ गठबंधन का फैसला भाजपा नेतृत्व ने प्रदेश नेताओं की राय को दरकिनार करके लिया है। इसके लिए सेठी का सुझाव अहम रहा। उन्होंने ही केमिस्ट्री के बजाय पार्टी को वोट गणित साधने को कहा था।