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अपनी ही सरकार में दीनहीन हुए दीनदयाल उपाध्याय

Thu, 02 Jun 2016 05:48 AM IST
एम संजय/अमर उजाला, नई दिल्ली
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सरकार के अपने चैनल दूरदर्शन में कामकाज के हालात को लेकर संघ परिवार में घोर निराशा और चिंता का माहौल है। उसके विचार पुरुष दीनदयाल उपाध्याय अपने ही सरकार में दीनहीन हो गए हैं। उनके जीवन पर बनने वाला धारावाहिक आर्थिक तंगी की वजह से अब सपना हो गया है।
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रामायण में राम का किरदार निभाने वाले चर्चित अभिनेता अरुण गोविल ने दूरदर्शन के रवैये से तंग होकर दीनदयाल को लेकर बनने वाले धारावाहिक से इनकार कर दिया है। जबकि कुप्रबंधन और सही ढंग से कार्यक्रमों की निगरानी न होने की वजह से दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल ने दूसरे धारावाहिक दिखा कर में ीते एक वर्ष में 162 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान उठाया है।

सूत्र बताते हैं कि दूरदर्शन के जरिए अपने विचार पुरुष की अनदेखी और अलोकप्रिय धारावाहिकों से 162 करोड़ रुपये के नुकसान का आंकड़ा देखकर संघ के शीर्ष अधिकारी हतप्रभ हैं। संघ के एक शीर्ष अधिकारी ने दूरदर्शन के कामकाज के तरीकों पर इशारा करते हुए कहा कि कांग्रेस शासन में ऐसा होता क्या। इस मामले में उनकी नाराजगी सरकार के सुस्ती को लेकर भी है।
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दरअसल मोदी सरकार के आते ही संघ ने अपने विचार पुरुषों के बारे में प्रचार-प्रसार की रणनीति बनाई। ताकि नेहरू और गांधी की तरह उनके आदर्श चेहरों को भी देश की युवा पीढ़ी समझ सके। इसके लिए सरकार के चैनलों का सहारा लेने की रणनीति बनी।

सूत्र बताते हैं कि संघ-भाजपा के शीर्ष नेताओं के कहने पर अरुण गोविल ने दीनदयाल के जीवन मूल्यों पर आधारित धारावाहिक बनाने का प्रस्ताव वर्ष 2015 के मध्य में दूरदर्शन को भेजा। दूरदर्शन ने इसके लिए पायलट भी उनसे मांगा जिसे उन्होंने सौंप दिया।

दीनदयाल धारावाहिक के मंजूर होने के वक्त सावित्री बाई फूले समेत 19 धारावाहिकों को एसएफएस (दूरदर्शन के जरिए वित्तपोषित) श्रेणी में मंजूरी मिली। बाद में नई स्लॉट नीति तय होने के बाद दूरदर्शन ने अपनी ओर से नई शर्तें थोप दी।

धारावाहिक के मूल्य 30 प्रतिशत कम करने के साथ ही उनके एपिसोड की संख्या में कटौती कर दी गई। प्रति एपिसोड महज 2.25 लाख रुपये की दर निर्धारित की गई थी। इसके बावजूद वे सीरियल करने को तैयार थे।

उन्होंने दीनदयाल पर शोध और सूटिंग की जगह भी तलाश लिए थे। लेकिन दूरदर्शन के अधिकारियों ने 26 सितंबर तक सीरियल खत्म करने की समय सीमा निर्धारित कर दी। जिसके वजह से अपना हाथ खींच लिया। इस मामले में उन्हें सरकार का भी साथ नहीं मिला।

अब दूरदर्शन के घाटे का आंकड़ा चर्चा में आने के बाद भगवा नेताओं की बेचैनी बढ़ी है। बताया जा रहा है कि प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने दूरदर्शन के कार्यकलापों का लेखा-जोखा बनाकर केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली को भेजा है।

क्रियाकलापों के इस पुलिंदे में दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल को महज 23 धारावाहिकों से ही 162 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान वर्ष 2015-16 में उठाना पड़ा है। इसके बावजूद कुछ सिरियल अभी चल ही रहे हैं।
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दूरदर्शन पर चलने वाले प्रमुख सीरियल और उससे हुए नुकसान

दूरदर्शन पर चलने वाले प्रमुख सीरियल और उससे हुए नुकसान
सिरियल नाम                                    नुकसान
ख्वाबों के दरमियां                             14.88 करोड़
दिल को आज फिर जीने की तमन्ना है         11.62 करोड़
जिंदगी एक भंवर                              13.90 करोड़
दर्द का रिश्ता                                   9.22 करोड़
पलटन                                         11.15 करोड़
हैप्पी होम्स                                     6.81 करोड़
जन्मों का बंधन                                9.66 करोड़
40प्लस                                       3.47 करोड़
खामोश सा अफसाना                          6.98 करोड़
रणभेरी                                        9.50 करोड़
बेटी की फर्ज                                 6.09 करोड़
जब जब बहार आई                          5.03 करोड़
आईपीएस डायरी                              5.99 करोड़  
मशाल                                       3.21 करोड़
तुम बिन जीया जाए ना                       6.36 करोड़
अधिकार ..एक कसम एक तपस्या            5.62 करोड़
हमनवाज                                     3.03 करोड़
उम्मीद नई सुबह की                         2.48 करोड़  
प्रगति                                        5.23 करोड़
एक लक्ष्य                                    3.71 करोड़
छुपाऊं कैसे लागा चुनरी में दाग               4.58 करोड़
ऐसी प्रेम कहानी                              4.99 करोड़
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