कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा हल्का किए जाने के बाद सरकार और विपक्ष के बीच सियासी संग्राम शुरू हो गया है। इस कड़ी में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग पर संसद भवन में जहां केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के नेतृत्व में राजग के 18 सांसदों ने पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।
वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में बसपा समेत कई दलों के नेताओं ने राष्ट्रपति भवन का दरवाजा खटखटाया। राजग और विपक्षी दलों ने एक दूसरे पर दलित विरोधी होने के आरोप लगाए।
मुलाकात के बाद पासवान ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने एससी-एसटी एक्ट मामले में पुनर्विचार याचिका, पदोन्नति में आरक्षण सहित छह मुद्दों पर प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा। पासवान ने कहा कि दलितों-आदिवासियों-पिछड़ों का सशक्तिकरण हमेशा गैरकांग्रेसी सरकारों में हुआ है।
पीएम ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कानून मंत्रालय द्वारा समीक्षा के बाद उचित निर्णय का भरोसा दिया है। बकौल पासवान पीएम और सरकार का इस मामले में रुख बेहद सकारात्मक है। जल्द ही इसके नतीजे सामने आएंगे। पीएम से मिलने वालों में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, अर्जुनराम मेघवाल, विजय सांपला, सांसद उदित राज आदि शामिल थे।
उधर राहुल ने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद कहा कि एक तरफ देश में दलितों-आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार बढ़ रहे हैं तो दूसरी तरफ इस कानून के तहत इस वर्ग को मिले सबसे बड़े हथियार की धार कुंद की जा रही है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने इस मामले में दखल देने का भरोसा दिया है। गौरतलब है कि विपक्ष इस मामले में सरकार पर सुप्रीम कोर्ट में सही ढंग से पक्ष नहीं रखने का आरोप लगा रही है। राहुल के साथ प्रतिनिधिमंडल में बसपा के सतीश मिश्र, अहमद पटेल, गुलाम नबी आजाद सहित कुछ अन्य दलों के सांसद मौजूद थे।