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सिटिजनशिप बिल पर उत्तर-पूर्व में भाजपा के खिलाफ किलाबंदी, साथ आईं सहयोगी जदयू समेत 10 पार्टियां

Wed, 30 Jan 2019 08:26 AM IST
Shani Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आइजोल
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Citizenship bill protest
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सिटीजनशिप बिल के खिलाफ जनता दल यूनाइटेड समेत भाजपा के सात सहयोगी दल और उत्तर-पूर्व के 10 पार्टियों ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को इन पार्टियों ने संयुक्त रूप से चर्चा की। इन दस पार्टियों में से असम गण परिषद्, नागा पीपल्स फ्रंट (एनपीएफ) भाजपा के सहयोगी रह चुके हैं तो खनाम का भाजपा शासित मेघालय में प्रभाव है। एजीपी और एनपीएफ ने सभी पार्टियों के बैठक में कहा कि उनका प्रयास होगा कि केंद्र का सिटिजनशिप बिल राज्यसभा में गिर जाए।

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गौरतलब है कि केंद्र सरकार का सिटिजनशिप बिल बांग्लादेश, पकिस्तान और अफगानिस्तान के गैर हिंदुओं को धार्मिक आधार पर नागरिकता प्रदान करता है। उत्तर-पूर्व के पार्टियों की बैठक में भाजपा के कई सहयोगी शामिल हुए। इनमें मिजोरम का मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ), एनपीपी, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी, हिल स्टेट पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी,  मेघालय का पीपल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट, नागालैंड का नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी और त्रिपुरा का स्वदेशी पीपल्स फ्रंट शामिल है।
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मेघालय के मुख्यमंत्री कोनार्ड संगमा इस बिल का विरोध करने वाले शुरूआती लोगों में शामिल थे। उन्होंने कहा कि सभी पार्टियां अपने-अपने राज्यों में विरोध कर रही थी। हमने उन्हें साथ आकर एक आवाज में बात उठाने को कहा है। कोनार्ड की एनपीपी और भाजपा ने पिछले साल मिलकर मेघालय में सरकार बनाई थी। मीटिंग में दो प्रस्ताव पास हुए, पहला कि अगर यह बिल राजयसभा में पास हो गया तो एक प्रतिनिधि मंडल राष्ट्रपति से मुलाकात करेगा और प्रधानमंत्री से भी इस मुद्दे पर चर्चा करेगा। दूसरा सभी पार्टियां एक कमेटी बनाएगी जो इस बिल के खिलाफ जनभावना को एक करेगी।

सिटीजनशिप बिल पर भाजपा से अनबन के बावजूद आने वाले आमचुनाव से पहले उत्तर-पूर्व में भाजपा के खिलाफ गठबंधन बनाने के सवाल पर कोनार्ड ने कहा कि हम इससे राजनीति को दूर नहीं रख सकते। सभी पार्टियों ने इस मीटिंग से पहले उत्तर-पूर्व जनतांत्रिक गठबंधन के संयोजक हेमंत बिस्वा को इसकी जानकारी दी और कहा कि हमारा मुख्य दायित्व जनता के प्रति है।
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मिजोरम के मुख्यमंत्री और मिजो नेशनल फ्रंट के मुखिया जोरमथांगा ने कहा कि यह बिल हमारे लिए खतरनाक और हानिकारक है। उन्होंने भाजपा के साथ अपने गठबंधन को लेकर भी चेतावनी दी। एजीपी प्रमुख अतुल बोरा ने सभी परियों के इस बैठक को ऐतिहासिक करार दिया। असम गण परिषद् ने लोकसभा में सिटिजनशिप बिल पास होने के बाद इस महीने भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया था। 

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