असम में आदिवासी समुदायों की भूमि पर अधिकार को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। एक ओर जहां भाजपा ने राज्य की सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराया, वहीं कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह रियल एस्टेट ब्रोकर की तरह काम कर रही है और बड़ी कंपनियों को आदिवासी जमीन सौंप रही है।
सीएम पर आदिवासियों की जमीन हड़पने का आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व वाली सरकार छठी अनुसूची क्षेत्रों की आदिवासी जमीन हड़प कर निवेशकों को दे रही है और राज्यभर में निशाने पर आधारित बेदखली अभियान चला रही है। दिपुह में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने कहा, 'मुख्यमंत्री सरमा संविधान में वर्णित छठी अनुसूची की मूल भावना पर हमला कर रहे हैं। वे हजारों बीघा आदिवासी जमीन छीनकर अपने पसंदीदा लोगों को दे रहे हैं।'
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गौरव गोगोई ने क्या लगाए आरोप?
गौरव गोगोई ने यह भी कहा कि करबी आंगलोंग, दीमा हासाओ और बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन (बीटीआर) में प्रस्तावित औद्योगिक निवेश की आड़ में आदिवासी जमीनों को छीनने का काम हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि करीब 41,000 बीघा आदिवासी जमीन सरकार की तरफ से ली जा चुकी है, और स्वायत्त परिषदों के नेता चुप हैं। 'कांग्रेस आदिवासियों के भूमि अधिकारों के लिए संघर्ष करेगी।'
राज्यपाल को कांग्रेस ने सौंपा ज्ञापन
कांग्रेस विधायी दल (सीएलपी) ने नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया के नेतृत्व में राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें मांग की गई कि सरकार की तरफ से किए जा रहे बेदखली अभियानों पर रोक लगाई जाए और 2022 के बाद से अब तक की सभी बेदखली घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए, खासकर छठी अनुसूची वाले जिलों और आदिवासी क्षेत्रों में। इसके साथ ही, कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि वह एक स्पष्ट भूमि अधिकार नीति बनाए, जिसमें लंबे समय से बसे स्थानीय लोगों और नए अतिक्रमणकारियों के बीच अंतर किया जाए, और विस्थापितों का मानवीय पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए।
कांग्रेस के आरोप पर भाजपा का जवाब
वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने कहा कि 'भाजपा और राज्य सरकार असम की पहचान, भूमि और विरासत की रक्षा के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। हम स्थानीय लोगों के अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य में 922 सत्रों (वैष्णव मठों) पर अतिक्रमण हो चुका है और सरकार इन धार्मिक संस्थाओं की खोई हुई गरिमा को वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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गौरव गोगोई को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने दी चुनौती
दिलीप सैकिया ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि 'कांग्रेस ने पिछले 70 वर्षों में स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा नहीं की बल्कि एक खास धार्मिक समुदाय के वोटबैंक पर निर्भर रही। इसी तुष्टिकरण ने अवैध घुसपैठियों को बढ़ावा दिया और हजारों बीघा जमीन पर कब्जा करा दिया।' उन्होंने कांग्रेस नेताओं गौरव गोगोई और धुबरी के सांसद रकीबुल हुसैन को चुनौती दी कि वे सार्वजनिक रूप से अतिक्रमणकारियों से जमीन खाली करने की अपील करें।'