बीजेपी ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र की एजेंसियों के स्थान पर निजी लैब्स को आरटी-पीसीआर और एंटीबॉडी जांच करने को लेकर 270 करोड़ रूपये लूटे हैं।
भाजपा नेता प्रवीण दरेकर ने शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार पर जोरदार हमला बोला, उन्होंने कहा कि केंद्र की एजेंसियों और निजी लैब्स के जांच कीमतों में फर्क से यह लूट हुई है।
दरेकर ने आरोप लगाया कि केंद्र की एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड कोरोना वायरस की जांच बहुत कम पैसों में कर रही थी। लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने जांच के लिए निजी लैब्स को चुना जिसके कारण 270 रूपये का घाटा हुआ।
उन्होंने कहा कि इस लूट की जांच रिटायर जजों के द्वारा की जानी चाहिए। केन्द्र की एजेंसी ने सात जुलाई को कहा था कि वह एक आरटी-पीसीआर जांच 1700 रुपये में करेगी। लेकिन उस वक्त राज्य सरकार ने निजी लैब्स के लिए 1900 से 2200 रुपये प्रति जांच का दर तय किया। इसके बाद 19 अगस्त को केन्द्रीय एजेंसी ने आरटी-पीसीआर जांच 795 रुपये में करने की बात कही थी।
उन्होंने कहा कि उस वक्त केन्द्र द्वारा मान्यता प्राप्त एजेंसी और निजी एजेंसियों के बीच जांच की दर का अंतर 1,256 रुपये हो गया। अगर अब हम यह मानें कि राज्य में 50 प्रतिशत जांच निजी कंपनियों ने की है, तो इस आधार पर उन्होंने अभी तक 19,34,096 जांच किए हैं।
उन्होंने दावा किया कि लोगों को प्रत्येक जांच के लिए 1256 रुपये ज्यादा देने पड़े। इसका मतलब यह हुआ कि लोगों ने 242.92 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च किए।
साथ ही दरेकर ने कहा इसी प्रकार एचएलएल ने एंटीबॉडी जांच 291 रुपये में करने को कहा था जबकि निजी लैब्स 599 में जांच कर रही हैं। यहां 27 करोड़ रुपये का फर्क आ रहा है। कुल लूट 270 करोड़ रुपये की हुई है।
ऐसा पहली बार नहीं जब महाराष्ट्र की सरकार पर इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं, पिछले दिनों ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी का मुद्दा भी भाजपा नेताओं ने उठाया था। इसके बाद उद्दव सरकार ने ऑक्सीजन सिलेंडर बढ़ाने की बात कही थी।