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भाजपा का बड़ा आरोप, बोली- 'गुपकार गैंग' के गठन के पीछे कांग्रेस का हाथ

Sun, 06 Dec 2020 09:39 PM IST
योगेश साहू पीटीआई, जम्मू/नई दिल्ली।
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शाहनवाज हुसैन - फोटो : अमर उजाला
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भाजपा के वरिष्ठ नेता शाहनवाज हुसैन ने रविवार को आरोप लगाया कि 'गुपकार गैंग' के गठन के पीछे कांग्रेस का हाथ है। जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली की मांग को लेकर मुख्यधारा के सात दलों ने मिलकर गुपकर घोषणापत्र गठबंधन (पीएजीडी) का गठन किया है।

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पीएजीडी के घटक दलों नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) पर निशाना साधते हुए हुसैन ने कहा कि दोनों दलों के नेताओं ने पिछले 70 वर्षों में जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए कुछ भी नहीं किया।

कश्मीर से जम्मू पहुंचने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता हुसैन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस दावा करती है कि वह गुपकार गैंग का हिस्सा नहीं है, लेकिन सच्चाई यह है कि वही सिर्फ एक ऐसी पार्टी है जो कि पर्दे के पीछे है। वह कांग्रेस ही थी जिसने गुपकार गैंग के गठन की योजना बनाई और गठबंधन के सभी दल इसकी कठपुतली हैं।
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हुसैन कश्मीर में जिला विकास परिषद में किस्मत आजमा रहे पार्टी उम्मीदवारों के लिए पिछले करीब 15 दिनों से प्रचार करने में जुटे हुए थे। वह सोमवार को डोडा जिले में प्रचार के लिए जा सकते हैं।

हुसैन ने कहा कि हमारे प्रतिद्वंद्वी 'विकास' शब्द से काफी दूर हैं क्योंकि उन्होंने पिछले 70 वर्षों में कुछ भी नहीं किया। वे भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता को देखकर जनता को भ्रमित कर रहे हैं।

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क्या है गुपकार गठबंधन

दरअसल, गुपकार जम्मू-कश्मीर के विपक्षी दलों का एक गठबंधन है, जिसे पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकर डिक्लेयरेशन (पीएजीडी) का नाम दिया गया है, जो एक तरह का घोषणा पत्र है। इसी गुपकार घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने वाली सभी पार्टियों के एक समूह को गुपकार गठबंधन कहा जाता है।

गुपकार समझौते का लक्ष्य

गुपकार समझौते के प्रमुख लक्ष्य अनुच्छेद 370 की बहाली करना है। इस समझौते के तहत गठबंधन के अध्यक्ष नेशनल कॉन्फ्रेंस के चीफ फारुक अब्दुल्ला हैं और इसकी उपाध्यक्ष पीडीपी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती हैं।
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क्यों पड़ा गुपकार नाम?

दरअसल, गुपकार एक सड़क का नाम है। इसी सड़क पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला का घर है। बैठक उनके घर पर हुई थी, इसीलिए इसे गुपकार समझौते का नाम दे दिया गया। इसी जगह पर यानी फारूक अब्दुल्ला के आवास पर राज्य से आर्टिकल 370 हटने से एक दिन पहले यानी 4 अगस्त 2019 को कश्मीर के कुछ दलों ने एक साथ बैठक की थी।
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