पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह (फाइल फोटो)
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राज्यसभा में बीजेपी अब पहले के मुकाबले और भी ज्यादा ताकतवर हो गई है। उच्च सदन में अब बीजेपी के 86 सांसद हैं। वहीं, कांग्रेस के 41 सांसद मौजूद हैं। 245 सदस्यीय सदन में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) के अब लगभग 100 सदस्य हो गए हैं। वहीं, अगर एआईएडीएमके के नौ सांसद, बीजेडी के नौ सांसद, वाईएसआर कांग्रेस के छह सांसद, और कई संबद्ध नामांकित सदस्यों और छोटे दोस्ताना दलों के समर्थन को शामिल कर दिया जाए तो मोदी 2.0 को किसी भी बिल को पास कराने में अब परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
दरअसल चुनाव आयोग ने मार्च में 55 सहित 61 सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनावों की घोषणा की थी, लेकिन कोरोना वायरस महामारी के कारण इस प्रक्रिया में देरी हुई। बता दें कि 42 सांसदों का निर्विरोध निर्वाचन हुआ। वहीं, बाकी की 19 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने आठ, कांग्रेस और वाईएसआर कांग्रेस ने तीन सीटों पर चुनाव लड़ा।
मध्य प्रदेश और गुजरात में कांग्रेस के कई विधायकों के दलबदल के कारण भाजपा को फायदा हुआ, जहां संभावना से ज्यादा पार्टी को कुछ और सीटें मिल गईं। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने कुल 17, कांग्रेस ने नौ, जेडीयू ने तीन, बीजेडी और टीएमसी ने चार-चार, अन्नाद्रमुक और द्रमुक ने तीन-तीन, राकांपा, राजद और टीआरएस ने दो-दो सीटों पर जीत दर्ज की।
61 नए सदस्यों में से 43 ऐसे सांसद हैं जो राज्यसभा में पहली बार चुन कर आ रहे हैं। इनमें भाजपा के ज्योतिरादित्य सिंधिया और कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल हैं। ये दोनों ही नेता लोकसभा के सदस्य रहे हैं, लेकिन साल 2019 के लोकसभा चुनाव में इन्हें हार का सामना करना पड़ा था। बता दें कि 2019 चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़े थे।
इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा और पूर्व लोकसभा उपाध्यक्ष एम डॉ एम तंबीदुरै भी राज्यसभा के लिए चुने गए हैं।