असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुूचेरी विधानसभा चुनाव के नतीजे भाजपा के लिए बेहद सकारात्मक रहे हैं। कांग्रेस की जो स्थिति बीते लोकसभा चुनाव के दौरान थी वह अब भी बरकरार है। उसके लिए हालात बदले नहीं हैं। केरल में बेशक वाम दल की सरकार बनी है मगर पश्चिम बंगाल में उसका तीसरे नंबर पर जाना सबसे बड़ा झटका है। परिणाम यह भी दर्शा रहा है कि क्षेत्रीय दलों का प्रभाव बरकरार रहेगा।
असम में जीत दर्ज करने और अन्य राज्यों में प्रभाव बढ़ाने के साथ भाजपा के लिए परिणाम सकारात्मक हैं। लेकिन जयललिता और ममता बनर्जी के रूप में दो शक्तिशाली नेताओं से उन्हें मुकाबला करना पड़ेगा। ये दोनों ही नेत्रियां केंद्र सरकार के इशारे पर नाचने वाली नहीं हैं। हां सरकार के कुछ कामकाज के मामले में उनका केंद्र को सहयोग हो सकता है। मगर सियासी सहयोग मिलने के आसार कम हैं। ममता ने तो क्षेत्रीय दलों को जोड़कर नई ताकत खड़ी करने की बात भी कह दी है। ऐसे ही दूसरी दफे जीतने के बाद जयललिता भी केंद्र में अपना बड़ा रोल चाहेंगी।
उनके नेतृत्व में परिपाटी तोड़ते हुए वर्ष 1984 के बाद पहली बार तमिलनाडु में किसी दल ने दोबारा से जीत दर्ज कर सत्ता में वापसी की है। इसके लिए मुख्यमंत्री जयललिता बड़े श्रेय की पात्र हैं। अपने कामकाज के उपलब्धियों के सहारे उन्होंने जोरदार वापसी की है। बीच-बीच में उनके खिलाफ हवा बनी मगर वह बाजी मारने में कामयाब रही हैं। इससे देश की राजनीति में भी उनका कद बढ़ेगा। केरल में परिणाम पुराने पैटर्न का रहा है। यहां हर चुनाव में सत्ता परिवर्तन होता है। इस दफे भी यह क्रम जारी रहा। मगर यहां इस दफे नए नेता उभर कर सामने आएंगे। उम्मीद कम है कि अच्युतानंनदन को कमान मिले।