गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए अंतिम चरण के मतदान का प्रचार बेशक मंगलवार को थम गया। मगर कांग्रेस-भाजपा के बीच सियासी आरोपों प्रत्यारोपों का दौर बुधवार देर रात तक चला। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पीएम मोदी पर पद के अपमान का आरोप लगाते हुए हमला क्या बोला। भाजपा ने पलटवार की झड़ी लगा दी। अहमदाबाद से लेकर दिल्ली तक से मनमोहन को आईना दिखाया गया कि उनके शासन के दौरान पीएम पद की कितनी गरिमा थी।
भाजपा ने कहा है कि मनमोहन के वक्त सत्ता का केंद्र कहीं था। निर्णय पीएम नहीं बल्कि बिना पद और गोपनियता की शपथ लिए लोग करते थे। पार्टी ने इस आशय के समर्थन में कुछ ई-मेल भी प्रस्तुत किए हैं। अहमदाबाद में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मनमोहन पर हमला बोला तो उसके तुरंत बाद दिल्ली से केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल तक ने पूर्व पीएम पर जमकर निशाना साधा। गुजरात चुनाव के अवसर पर मनमोहन में आए गुस्सा और संवेदनहीनता पर भाजपा ने आश्चर्य जताया है।
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शाह ने कहा गुजरात की जनता देगी जवाब
ज्यंती नटराजन
मनमोहन सिंह के जरिए पीएम मोदी पर पद की गरिमा को घटाने के आरोप के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि गुजरात की जनता इसका जवाब देगी। उन्होंने कहा कि गुजरात चुनाव के मौके पर मनमोहन में जगी संवेदनशीलता और गुस्सा से साफ नजर आ रहा है कि वे किसी के ढ़ाल के रूप में कार्य कर रहे हैं। शाह ने कहा कि मनमोहन को उस वक्त क्यों नहीं गुस्सा आया जब सोनिया गांधी ने मोदी को मौत का सौदागर और मणिशंकर अय्यर ने नीच कहा था।
उन्होंने कहा कि उस वक्त मनमोहन की संवेदनशिलता कहां गई थी जब उनके दल के सांसद राहुल गांधी ने उनकी सरकार के फैसले का ऑरडिनेंस फाड़ा था और जब उनके पांव के नीचे शासन में लूट मची हुई थी। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि मनमोहन को गुजरात चुनाव के मौके पर पद की मर्यादा और सवंदनशीलता की याद आ रही है। गुजरात की जनता इसका जवाब देगी। पीएम मोदी की लोकप्रियता देश और दुनिया में बढ़ी है।
ज्यंती नटराजन के ई-मेल का लिया भाजपा ने सहारा
मनमोहन और राहुल गांधी पर सियासी हमला बोलने के लिए भाजपा ने यूपीए सरकार की मंत्री ज्यंती नटराजन के ई-मेल को औजार बनाया। ज्यंती के अलग-अलग तीन ई-मेल को मीडिया के सामने पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मनोहन की अक्षमता से लेकर राहुल के में सुशासन भाव की कमी को आगे किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ज्यंती टैक्स नहीं तब राहुल टैक्स चलता था।
उन्होंने राहुल के निजी सहायक की ओर से लिखे गए ज्यंती को एक मेल का सहारा लेते हुए कहा कि उस वक्त सुशासन का आलम यह था कि सरकार के मंत्री कार्य आदेश के लिए नेता के निजी सहायक से मिलने आते थे। दूसरे मेल में राहुल के कामकाज की क्षमता पर निशाना साधा गया है जिसमें राहुल ने ज्यंती को अपने संसदीय क्षेत्र के राष्ट्रीय राजमार्ग बनने में आ रही अड़चन को दूर करने का निर्देश दिया था।
भाजपा का आरोप सत्ता का केंद्र नहीं थे मनमोहन
मनमोहन सिंह
- फोटो : SELF
ज्यंती ने जब मामले की पड़ताल कराई तो ऐसा कोई प्रस्ताव ही नहीं दिखा। बल्कि अपने ही सरकार के दूसरे विभाग की अक्षमता नजर आई। तीसरे ई-मेल में जीएम फसल के फिल्ड ट्रायल पर उस वक्त के पीएम मनमोहन और ज्यंती के बीच की चर्चा का जिक्र है। तब मनमोहन ने अपने शक्तियों का अहसास कराते हुए ज्यंती को जीएम फसलों की फिल्ड ट्रायल के अनुमति देने की बात कही थी। लेकिन ज्यंती ने ऐसा नहीं किया क्योंकि तब सोनिया गांधी ने जीएम फसल पर रो का निर्देश दे रखा है।
ज्यंती नटराजन के ई-मेलों का उल्लेख करते हुए भाजपा ने पूर्व पीएम मनमोहन पर आरोप लगाया है कि वे सत्ता का केंद्र नहीं थे। बल्कि सरकार के फैसले सरकार के बाहर बैठे लोग लेते थे। जिनकी जवाबदेही नहीं थी। भाजपा को आश्चर्य इस बात का है कि पीएम पद पर रहते वक्त मौन रहने वाले मनमोहन अचानक से आक्रामक क्यों हो गए हैं। इसलिए पार्टी ने उन्हें ढ़ाल करार दिया है। दरअसल पीएम मोदी के जरिए लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए मनमोहन ने कहा था कि मोदी पीएम पद की गरिमा को बट्टा लगा रहे हैं।
मनमोहन का जवाब उन आरोपों को लकर था जिसमें मोदी ने कहा था कि मणिशंकर अय्यर के घर हुई बैठक में पाक नेताओं के संग अहमद पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाने की रणनीति बनी थी। इस बैठक में मनमोहन भी उपस्थित थे। इससे पहले भाजपा ने मीडिय़ा को दिए राहुल गांधी के इंटरव्यू पर भी सवाल उठाया। उसने इस मामले की शिकायत आयोग से भी की है। चुनाव प्रचार थमने के बाद भी भाजपा-कांग्रेस के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप के दौर के बाद माना जा रहा है कि गुजरात के चुनाव में दोनों दलों के बीच मुकाबला कांटे का हो गया है। इसलिए दोनों ही दल अंतिम समय तक वोटर को अपने पाले में खिंचने में लगे हैं। जिस वजह से आरोप-प्रत्यारोप के शब्दों में विषैलापन भी उभर आया है।