करीब एक साल चली तनातनी के बाद भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना में फिर से दोस्ती हो गई है। लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर दोनों पार्टियों में सीटों पर समझौता हो गया है। भाजपा 25 सीटों पर जबकि शिवसेना 23 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियां बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। सोमवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे की लंबी मुलाकात के बाद इस पर आखिरी मुहर लग गई। बैठक के बाद दोनों नेताओं ने साझा प्रेस कांफ्रेंस की। सीएम देवेंद्र फणनवीस भी इस दौरान मौजूद रहे और महत्वपूर्ण घोषणा की।
अमित शाह: करोड़ों कार्यकर्ताओं की इच्छा पूरी हुई है। भाजपा का सबसे पुराना दोस्त शिवसेना है। हर अच्छे बुरे वक्त में हमारा साथ दिया है। थोड़ा मनमुटाव था, आज इसी जगह पर सारा मनमुटाव खत्म कर आगे बढ़ने का फैसला लिया है। हमारा गठबंधन 45 सीटें जीतेगा। मोदीजी के नेतृत्व में एनडीए और मजबूत होगा। आशा करता हूं कि आने वाले वक्त में मोदी जी के नेतृत्व में एक मजबूत सरकार देने में कामयाब होंगे।
उद्धव ठाकरे: महाराष्ट्र के सीएम ने इस प्रेस कांफ्रेंस में सभी बड़ी बातें सामने रख दी हैं। मुझे नहीं लगता कि कुछ और बाकी रह गया है। कुछ और कहने से पहले मैं पुलवामा हमले में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देना चाहता हूं। चार महीने में विधानसभा चुनाव हैं, सीटें बराबर बांटी गई हैं। जिम्मेदारियां भी बराबर बांटी जाएंगी। लोग शिवसेना और भाजपा को 30 साल से देख रहे हैं। 25 साल तक हम साथ रहे। पांच साल के लिए कुछ कंफ्यूजन था। लेकिन जैसा कि सीएम ने कहा, मैंने सरकार को समय समय पर गाइडेंस दी।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुंबई में मुलाकात की। दोनों के बीच आगामी आम चुनाव को लेकर लोकसभा सीट बंटवारे पर चर्चा हुई। बाहर से भले ही शिवसेना आए दिन भाजपा और पीएम नरेंद्र मोदी पर रोजाना हमले बोल रही थी, लेकिन अंदरखाने दोनों पार्टियों में बातचीत जारी थी। हाल ही में प्रशांत किशोर ने भी उद्धव ठाकरे से मुलाकात की थी।
भाजपा-शिवसेना दोस्ती का असर
लोकसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच भाजपा-शिवसेना के बीच दोबारा हुई दोस्ती बाकी दलों का खेल बिगाड़ सकती है। महाराष्ट्र में अगर दोनों दल मिलकर चुनाव लड़ें तो कांग्रेस और अन्य दलों के लिए लड़ाई मुश्किल हो सकती है। हालिया उपचुनाव में शिवसेना ने अलग चुनाव लड़ा था। शिवसेना भी आए दिन सामना के जरिए भाजपा और नरेंद्र मोदी को निशाना बना रही थी। इसे देखते हुए लोकसभा चुनाव में शिवसेना के विपक्षी खेमे में जाने के कयास लग रहे थे।