मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में इस बार दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा और कांग्रेस को अपने अपने बागियों को मनाने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। दोनों पार्टियों को नुकसान रोकने के लिए बड़े नेताओं को समझाने बुझाने के काम में लगाना पड़ा है।
राज्य की करीब तीन दर्जन सीटें ऐसी हैं, जहां बागी उम्मीदवार नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। खास बात यह है कि चुनाव मैदान में बागियों की मौजूदगी ने भाजपा और कांग्रेस, दोनों की ही चिंताएं बढ़ाई है। लिहाजा भाजपा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अलावा केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, उपाध्यक्ष प्रभात झा, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल, प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह से लेकर तमाम नेता बतौर निर्दलीय नामांकन फार्म जमा करने वालों को समझाने में जुटे हैं।
जबकि कांग्रेस में यही काम वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के जिम्मे है। ये नेता अपने अपने इलाकों में समर्थकों को नाम वापसी के लिए तैयार करने में जुटे हैं। प्रदेश में 230 विधानसभा सीटों के लिए 28 नवंबर को एक चरण में चुनाव होना है। 14 नवंबर नामांकन पत्रों को वापस लेने की अंतिम तारीख है। राजनीतिक दल इसके पहले ही अपने बागियों को राजी कर लेना चाहते हैं।