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Vande Mataram Row: इंदौर की घटना पर BJP-कांग्रेस आमने-सामने, धार्मिक स्वतंत्रता बनाम राष्ट्रगीत पर सियासत तेज

Fri, 10 Apr 2026 02:18 PM IST
Riya Dubey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इंदौर में कांग्रेस पार्षदों के वंदे मातरम गाने से इनकार पर विवाद बढ़ गया है। बीजेपी ने इसे राष्ट्रीय गीत का अपमान और वोट बैंक की राजनीति बताया, जबकि पार्षदों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार बताते हुए अपने फैसले का बचाव किया।
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शहजाद पूनावाला, भाजपा नेता - फोटो : ANI
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विस्तार
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इंदौर नगर निगम की बैठक में वंदे मातरम गाने से इनकार करने की घटना को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। भाजपा ने कांग्रेस और विपक्षी आईएनडीआईए गठबंधन पर राष्ट्रीय गीत का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष देश की गरिमा से ज्यादा वोट बैंक की राजनीति को प्राथमिकता देता है।

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दरअसल, 8 अप्रैल को नगर निगम की बजट बैठक के दौरान कांग्रेस की पार्षद फौजिया शेख अलीम और रुबीना इकबाल ने वंदे मातरम गाने से इनकार कर दिया था। दोनों पार्षदों का कहना था कि उनका धर्म इसकी अनुमति नहीं देता। इस घटना के बाद बैठक में हंगामा भी हुआ और बीजेपी पार्षदों ने नारेबाजी की।

यह विपक्ष की सोच को दर्शाता है

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि विपक्ष की सोच को दर्शाता है। उन्होंने आईएनडीआईए गठबंधन को भारत विरोधी बताते हुए आरोप लगाया कि ये दल संविधान से ऊपर धार्मिक विचारों को रखते हैं। पूनावाला ने यह भी कहा कि कांग्रेस का एक वर्ग शुरू से ही वंदे मातरम का विरोध करता रहा है।

पूनेवाला ने कहा कि सिद्धारमैया ने वंदे मातरम का विरोध किया है। और अब गठबंधन के सदस्य और कांग्रेस पार्टी के नेता इसे गाने से लगातार इनकार कर रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे संविधान से ऊपर वोट बैंक की राजनीति को रखते हैं।

विपक्षी नेता धर्म का हवाला देकर राष्ट्रीय गीत से दूरी बना रहे

उन्होंने AIMIM, एनसीपी और समाजवादी पार्टी के नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कई विपक्षी नेता भी धर्म का हवाला देकर राष्ट्रीय गीत से दूरी बना रहे हैं। पूनावाला ने स्वतंत्रता सेनानी अशफाकुल्ला खान का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि क्या उनका वंदे मातरम गाना गलत था।

वंदे मातरम गाने के लिए बाध्य नहीं कर सकते

वहीं, कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम ने अपने रुख का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है और कोई उन्हें वंदे मातरम गाने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह राष्ट्रीय गीत का सम्मान करती हैं। इस मुद्दे पर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और यह विवाद आगे और बढ़ने के आसार हैं।

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