पश्चिम बंगाल में 15 वर्षों तक रहने के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इस बार विधानसभा चुनाव में न सिर्फ अपनी सत्ता बनाए रखने, बल्कि चौथी पारी हासिल करने की कोशिश करने की चुनौती से जुझ रही है।
पार्टी इस चुनाव में कल्याणकारी योजनाओं पर आधारित सामाजिक गठबंधन, मजबूत संगठन और ममता बनर्जी की लोकप्रियता का सहारा है।
वहीं, भाजपा की आक्रामक चुनौती और एसआईआर ने चुनावी परिदृश्य को और पेचीदा बना दिया है। लक्ष्मी भंडार, कन्याश्री और स्वास्थ्य साथी जैसी योजनाओं ने महिलाओं, ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत की है। साथ ही, बंगाली सांस्कृतिक पहचान को लेकर पार्टी ने खुद को राज्य की भाषा और संस्कृति का संरक्षक बताया है।
टीएमसी ने इस चुनाव से पहले अपने 74 विधायक बदल दिए, यानी अपनी कुल ताकत का लगभग एक तिहाई, और 291 सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित किए। यह रणनीति पार्टी के अंदर संतुलित जनरेशन चेंज और संगठनात्मक स्थिरता को बनाए रखने का प्रयास है। वरिष्ठ नेता जयप्रकाश मजूमदार के अनुसार, पार्टी का वोट और प्रतिनिधित्व लगातार बढ़ रहा है क्योंकि लोग कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ महसूस कर रहे हैं।
भाजपा ने संगठनात्मक ताकत को बनाया हथियार
भाजपा इस बार अपनी संगठनात्मक ताकत को सबसे बड़ा हथियार बना रही है। बूथ स्तर तक फैला मजबूत नेटवर्क, सक्रिय कार्यकर्ता तंत्र और केंद्रीय नेतृत्व की लगातार मौजूदगी पार्टी के बढ़े हुए आत्मविश्वास को दर्शाती है। साल 2021 के विधानसभा चुनाव में उल्लेखनीय प्रदर्शन के बाद भाजपा अब उस आधार को सत्ता में बदलने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी की चुनावी रणनीति में विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा व हिंदुत्व जैसे मुद्दे प्रमुखता से शामिल हैं। इसके साथ ही भाजपा राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार, कट मनी और प्रशासनिक पक्षपात के आरोपों को लगातार धार दे रही है।
बाबरी जैसी मस्जिद बनाने की घोषणा करने वाले हुमायूं ने अपनी सीट छोड़ी
बाबरी जैसी मस्जिद निर्माण की घोषणा कर चर्चा में आए तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित नेता हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ की पहली उम्मीदवार सूची जारी करते हुए ऐलान किया कि उनकी पार्टी 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। हुमायूं कबीर खुद मुर्शिदाबाद जिले की रेजिनगर और नाओदा सीट से चुनाव लड़ेंगे। इससे पहले वह भरतपुर सीट से चुनाव जीत चुके हैं। उन्होंने संकेत दिया कि एआईएमआईएम के साथ भी कुछ सीटों पर तालमेल हो सकता है।