चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि वैज्ञानिक और तकनीकी तौर पर कंजूरमार्ग में मेट्रो कारशेड नहीं बन सकता। फिर भी उद्धव ठाकरे जिद पर अड़े हैं। यह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि बुलेट ट्रेन को लेकर कोई समस्या ही नहीं थी, लेकिन ठाणे के शील डायघर की जमीन बुलेट ट्रेन परियोजना को न देने का फैसला कर शिवसेना ने बुलेट ट्रेन आने से पहले ही उसे पटरी से उतारने का प्रयास किया है।
उन्होंने कहा, जबकि भाजपा ने मेट्रो कारशेड आरे की बजाय कंजूरमार्ग स्थानांतरित करने के विरोध में कोई आंदोलन नहीं किया। इसी तरह वाढवन बंदरगाह का भी विरोध शुरू किया गया है। मेरा मानना है कि इन विकास परियोजनाओं के साथ ही मराठा आरक्षण, धनगर आरक्षण के मुद्दे पर भी उद्धव ठाकरे को आगे आना चाहिए और विपक्ष के नेता को साथ लेकर प्रधानमंत्री से मिलना चाहिए।
पाटिल ने कहा कि पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार की पार्टी एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) ने लोकसभा में कृषि सुधार विधेयकों का समर्थन किया था। जिस दिन राज्यसभा में बिल पर चर्चा थी उस दिन शरद पवार वोटिंग के लिए नहीं आए जबकि वह देश में ही थे। वहीं, शिवसेना ने राज्यसभा में विधेयक का विरोध नहीं किया था बल्कि वॉकआउट किया था। लेकिन महाविकास अघाड़ी सरकार को बचाने के लिए पवार ने कृषि सुधार कानूनों का विरोध शुरू किया है।