ओडिशा की राजनीति में सोमवार को बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला। बीजू जनता दल (BJD) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद देबाशीष सामंतराय ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के साथ-साथ राज्यसभा से भी अपना पद छोड़ दिया।
समंतराय ने आरोप लगाया कि पार्टी में उन्हें लगातार नीचा दिखाया जा रहा था और उनकी अनदेखी की जा रही थी। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नवीन पटनायक के करीबी होने के बावजूद उन्हें पार्टी प्रमुख से मिलने तक नहीं दिया जा रहा था।
इस्तीफे के बाद समंतराय ने संसद में राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके साथ ही उन्होंने संकेत दिए कि वह जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनमोहन सामल की मौजूदगी में उनका बीजेपी में प्रवेश हो सकता है।
चुनावी हार के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया?
समंतराय ने बीजेडी की 2024 चुनावी हार के लिए पूर्व नौकरशाह से नेता बने वीके पांडियन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने के बावजूद पांडियन पर्दे के पीछे से पार्टी को प्रभावित कर रहे हैं।
अपने इस्तीफे पत्र में समंतराय ने लिखा कि उन्हें महसूस हुआ कि पार्टी को अब उनकी सेवाओं की जरूरत नहीं है, इसलिए उन्होंने “जनहित” में यह कठिन फैसला लिया है। हालांकि उन्होंने नवीन पटनायक का आभार जताते हुए कहा कि राज्यसभा भेजने और जनता की सेवा का अवसर देने के लिए वह हमेशा उनके ऋणी रहेंगे।
पार्टी की कार्यप्रणाली पर उठाए थे सवाल
दो बार विधायक रह चुके समंतराय पहले भी नवंबर 2025 में बीजेडी वरिष्ठ नागरिक प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुके थे। उस समय भी उन्होंने पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।
बीजू पटनायक को लेकर क्या बोले?
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेडी अब पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक की विचारधारा से दूर हो चुकी है। समंतराय ने सवाल उठाया कि बीजू पटनायक की विरासत को ऐसे लोगों के हाथों में क्यों सौंपा जा रहा है, जिनका उस विरासत से कोई सीधा संबंध नहीं है।
पार्टी ने क्या प्रतिक्रिया दी?
वहीं, बीजेडी ने उनके इस्तीफे को पार्टी के लिए झटका मानने से इनकार किया। पार्टी की ओर से विपक्ष की मुख्य सचेतक प्रमिला मल्लिक ने आरोप लगाया कि समंतराय राजनीति में व्यापारिक हितों के लिए थे, जनता की सेवा के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें विधायक और सांसद बनाया, लेकिन अब विपक्ष में आने के बाद उन्होंने साथ छोड़ दिया।
समंतराय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह व्यक्तिगत स्तर पर नीचे गिरकर बयानबाजी नहीं करना चाहते। उनके इस्तीफे के बाद राज्यसभा में बीजेडी सांसदों की संख्या घटकर पांच रह गई है।