नोट बंदी के फैसले पर हंगामे के कारण संसद के शीतकालीन सत्र के पूरी तरह धुल जाने से व्यथित बीजेडी के सांसद जय पांडा ने वेतन और भत्ता नहीं लेने की घोषणा की है।
उन्होंने कहा कि संसद में काम नहीं होने की स्थिति में सांसद को वेतन-भत्ता हासिल करने का नैतिक हक नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले भी हंगामा होने पर वह संबंधित दिन का वेतन लेने से परहेज करते आए हैं। गौरतलब है कि इस सत्र के दौरान हंगामे से नाराज भाजपा के वयोवृद्घ सांसद लालकृष्ण आडवाणी और शांता कुमार ने हंगामा करने वाले सांसदों का वेतन काटने का सुझाव दिया था।
पांडा ने कहा कि चूंकि शीत सत्र में कोई कामकाज नहीं हुआ, इसलिए उन्होंने इस अवधि का वेतन और भत्ता नहीं लेने का फैसला किया है। बकौल पांडा देश की सबसे बड़ी पंचायत पर देश की उ मीदों का बोझ है।