विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल (बीजद) ने रविवार को आरोप लगाया कि ओडिशा के पूर्व राज्यपाल रघुबर दास 'विवादास्पद' व्यक्ति हैं। बीजद ने कहा कि लोगों को यह जानना चाहिए कि उन्हें समय से पहले पद से क्यों हटाया गया।
बीजद की यह प्रतिक्रिया दास के शुक्रवार को अपने गृह राज्य झारखंड में भाजपा में शामिल होने के बाद आई है। भाजपा में शामिल होने के बाद रघुबर दास ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल के तौर पर लोगों के लिए काम किया, उनकी शिकायतें सुनीं और तीन महीने में 30 जिलों का दौरा किया। उन्होंने यह भी कहा, 'मैंने इस मिथक को तोड़ दिया है कि राज्यपाल का पद 'लाट साहब' होता है।'
राज्यपाल रहते हुए दास ने भाजपा एजेंट के रूप में काम किया: साहू
पूर्व मंत्री और विधायक अरुण कुमार साहू ने बीजद मुख्यालय भुवनेश्वर में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान साहू ने रघुबर दास पर आरोप लगाया कि उन्होंने राज्यपाल रहते हुए भाजपा के एजेंट के तौर पर काम किया।
साहू ने कहा, 'दास भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रहे थे और विवादास्पद व्यक्ति थे। वे कभी भी लोकप्रिय राज्यपाल नहीं रहे। उनकी यह टिप्पणी कि राज्यपालों को 'लाट साहब' नहीं कहा जाना चाहिए, कई सवाल खड़े करती है, जैसे कि क्या अन्य राज्यपाल 'लाट साहब' हैं।'
दास लोकप्रिय राज्यपाल थे, तो उन्हें पद से बेवजह क्यों हटाया
साहू ने यह भी सवाल किया कि यदि दास भाजपा द्वारा दावा किए गए लोकप्रिय राज्यपाल थे, तो उन्हें पद से बेवजह क्यों हटाया गया? भाजपा को इस संबंध में ओडिशा के लोगों को जवाब देना चाहिए। बीजद नेता ने यह भी सवाल किया कि दास के बेटे के खिलाफ पुलिस ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की, जिसने कथित तौर पर एक सरकारी कर्मचारी पर हमला किया था।
साहू ने दास के बेटे को दंडित करने की मांग दोहराई
साहू ने पूछा, क्या कोई सामान्य व्यक्ति ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारी पर हमला करने के बाद बेखौफ हो सकता है? उन्होंने दास के बेटे को कानून अपने हाथ में लेने के लिए दंडित करने की अपनी पार्टी की मांग दोहराई।
बीजद का आरोप- आम चुनावों में दास ने भाजपा के लिए प्रचार किया
बीजद ने दास पर राजभवन को राजनीतिक 'पार्टी कार्यालय' में बदलकर उसकी गरिमा को गिराने का भी आरोप लगाया। उन्होने आरोप लगाया कि सांविधानिक पद पर रहते हुए दास ने आम चुनावों से ठीक पहले भाजपा के लिए प्रचार करने के लिए पूरे राज्य का दौरा किया।
भाजपा ने बीजद के आरोपों का खंडन किया
हालांकि, भाजपा ने बीजद के आरोपों का खंडन किया और दावा किया कि ओडिशा के लोग दास को इसलिए पसंद करते हैं, क्योंकि उन्होंने ग्रामीणों के दरवाजे पर पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं। जबकि उनके मुख्यमंत्री (नवीन पटनायक का जिक्र करते हुए) भुवनेश्वर तक ही सीमित रहे।
भाजपा विधायक सरोज पाधी ने कहा, 'बीजद दास का विरोध कर रही थी, क्योंकि वह लोगों से मिल रहे थे, जबकि मुख्यमंत्री नवीन पटनायक लोगों से मिल नहीं पा रहे थे।'
कांग्रेस ने भी की दास की आलोचना
कांग्रेस ने भी राज्यपाल के तौर पर दास की आलोचना की। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पंचानन कानूनगो ने कहा, 'ओडिशा की कानून-व्यवस्था उसी दिन से खराब हो गई जब पुलिस ने उनके बेटे के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। उन्हें उसी दिन अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए था, जिस दिन उनके बेटे ने एक सरकारी कर्मचारी पर हमला किया था।'