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संसद: विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा से जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक पारित, जानिए क्या हैं नए बदलाव?

Fri, 31 Jul 2026 02:59 PM IST
निर्मल कांत एएनआई, नई दिल्ली।

सार

संसद के मानसून सत्र के 10वें दिन विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया गया। बिना चर्चा के पारित इस विधेयक में जन्म-मृत्यु के देर से पंजीकरण के नियमों को सख्त किया गया है। रिपोर्ट में जानिए विपक्ष के विरोध, सरकार के जवाब और विधेयक में हुए बदलावों के बारे में।
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लोकसभा की कार्यवाही - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/संसद टीवी
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विस्तार
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संसद के मानसून सत्र के 10वें दिन विपक्ष ने दोनों सदनों में जोरदार हंगामा किया। विपक्ष 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर चर्चा की मांग और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाबदेही की मांग करता रहा। हालांकि, इस बीच लोकसभा ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया। यह विधेयक बिना किसी चर्चा के मंजूर हुआ।
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दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद भाजपा सांसद दिलीप सैकिया की अध्यक्षता में विधेयक को चर्चा और मंजूरी के लिए पेश किया गया।

विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के बीच इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इस दौरान कई विपक्षी सांसद सदन के बीचों-बीच पहुंच गए और गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग करने लगे।

रिजिजू ने विपक्ष पर क्या कहा?
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने चर्चा में हिस्सा नहीं लेने को लेकर विपक्ष पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सरकार इस अहम विधेयक पर चर्चा चाहती थी।
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रिजिजू ने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। भविष्य में ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए। जिन लोगों ने आपको संसद भेजा है, वे आपसे जवाब मांगेंगे। उन्होंने विपक्षी सांसदों से अपील की कि वे भविष्य में विधेयकों पर चर्चा में हिस्सा लें, न कि सदन की कार्यवाही बाधित करें।

दिलीप सैकिया ने भी कहा कि विपक्ष के सहयोग के बिना विधेयक पारित होना दुर्भाग्यपूर्ण है। विधेयक पारित होने के तुरंत बाद सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। 

विधेयक में क्या बदलाव किए गए हैं?
  • यह विधेयक जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के कुछ प्रावधानों में बदलाव करता है।
  • इसका उद्देश्य जन्म और मृत्यु जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं की समय पर जानकारी दर्ज कराने को बढ़ावा देना है।
  • विधेयक में देरी से जन्म और मृत्यु का पंजीकरण कराने के नियमों को सख्त किया गया है।
  • अब घटना के दो साल से ज्यादा समय बाद पंजीकरण कराने के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत होगी।
  • मौजूदा कानून में एक साल से ज्यादा देरी होने पर जिला मजिस्ट्रेट, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत होती है। नए कानून में दो साल तक की देरी के लिए यही व्यवस्था जारी रहेगी।

विधेयक में और क्या बदलाव हैं?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 20 जुलाई को इस विधेयक को पेश करने की मंजूरी दी थी। इसमें 2023 में मूल कानून में किए गए बदलावों के बाद देरी से पंजीकरण की प्रक्रिया में और सुधार का प्रस्ताव रखा गया है।

ये भी पढ़ें: 'आप बीजेपी के हो क्या?': पुलिसवालों के परिजनों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के सवाल पर बोले राहुल; क्या है पूरा मामला?

विधेयक में कानूनी परिभाषाओं में भी बदलाव किया गया है। इसमें 'कार्यकारी मजिस्ट्रेट' शब्द को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अनुसार बदला गया है। पहले इसमें 1973 की आपराधिक प्रक्रिया संहिता का संदर्भ दिया जाता था।

अब राज्यसभा की मंजूरी का इंतजार
लोकसभा से विधेयक पारित होने के बाद सरकार ने मानसून सत्र में हंगामे के बीच एक और विधेयक पारित करा लिया है। अब तक इस सत्र में दो विधेयक लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 और राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 संसद के दोनों सदनों से मंजूर हो चुके हैं। जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को अब राज्यसभा की मंजूरी मिलना बाकी है।
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सदन की कार्यवाही के दौरान भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति को रिपोर्ट देने के लिए और समय दे दिया गया। यह समिति संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 की जांच कर रही है। अब समिति अपनी रिपोर्ट शीतकालीन सत्र के आखिरी सप्ताह के पहले दिन तक पेश कर सकती है।
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