इंदिरा प्रियदर्शिनी गांधी कोई साधारण महिला नहीं थी। वह दूरदर्शी नेता, आत्मविश्वासी और चुनावी राजनीति को भी बखूबी समझती थी। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी उनके 100वें जन्मदिन पर याद करते हुए कहते हैं कि उनमें अदम्य साहस था। प्रणब दा ने एक संस्मरण बताया। मार्च 1977 में आम चुनाव हारने के बाद वह देश के व्यापक दौरे पर थी। इसी क्रम में वह उ.प्र. के आजमगढ़ उपचुनाव प्रचार और आंध्र प्रदेश में चुनाव प्रचार के दौरे पर थी।
सर्किट हाऊस का रद्द हुआ आरक्षण
जब इंदिरा जी आजमगढ़ पहुंची तो उन्हें ऐनवक्त पर पता चला कि सर्किट हाऊस में जो कमरा आरक्षित हुआ था, वह किसी और को आवंटित कर दिया गया है। यही स्थिति उन्हें आंध्र प्रदेश में भी झेलनी पड़ी।
इंदिरा जी देश की प्रधानमंत्री रह चुकी थी। वह देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल की बेटी थी। सुख और वैभव में रही थी, लेकिन आजादी के आंदोलन के दौरान हर दिन भी देखे थे। प्रणब दा बताते हैं कि उनमें सूझ-बूझ के साथ अदम्य साहस था। लिहाजा उन्हें खुले आसमान के नीचे सोने में कोई परेशानी नहीं हुई। उन्होंने खुले आसमान के नीचे ही रात बिताई। कांग्रेस के नेताओं में प्रेरणा, विश्वास, भरोसा जगाया और आम जनता के दु:ख, दर्द की हिमायती बनकर सत्ता में वापस लौटी।