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जन्मदिन विशेष: संपूर्ण सिंह की अपने गीतों और कविताओं से गुलजार बनने की कहानी

Sat, 18 Aug 2018 10:00 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कभी जिंदगी एक पल में गुजर जाती है, कभी जिंदगी का एक पल भी नहीं गुजरता... ये है लफ्जों के जादूगर गुलजार की लिखी एक शायरी। आज उनका जन्मदिन है। संपूर्ण सिंह कालरा से गुलजार बनने तक के सफर में उनके जीवन में कई टर्निंग पॉइंट आए। चलिए आपको बताते हैं कि एक मैकेनिक से मशहूर गीतकार बन लोगों के दिलों पर राज करने वाले गुलजार के इस सफर के बारे में-
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18 अगस्त 1934 को जिला पंजाब के दीना गांव में जन्मे गुलजार का पूरा नाम संपूर्ण सिंह कालरा है। ये गांव झेलम नदी के पास स्थित है और ये जगह अब पाकिस्तान में है। विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया। दुनिया के मशहूर गीतकार बनने से पहले गुलजार एक मैकेनिक के तौर पर काम करते थे।
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गुलजार के जीवन में बड़ा मोड़ तब आया जब उनकी मुलाकात उस समय के बड़े निर्देशक बिमल रॉय से हुई। उन्होंने गुलजार को बंदिनी फिल्म में गाना लिखने का मौका दिया। दरउसल उनका मनमुटाव फिल्म के गीतकार से हो गया था। जिसके बाद उनके सामने गुलजार आ गए और उन्हें ये बड़ा मौका मिल गया।

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इस गाने के बाद गुलजार ने डायरेक्शन की दुनिया में भी कदम रखा। फिल्म में तो वह एक ही गाना पाए क्योंकि पुराना गीतकार तब वापस लौट आया था। लेकिन यही एक गाना उन्हें गुलजार बनाने की पहली सीढ़ी जैसा था। इसी गाने के बाद गुलजार का हुनर बिमल रॉय ने पहचान लिया और उन्हें बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर जोड़ लिया। वो गाना था- मोरा गोरा अंग लई ले, मोहे श्याम रंग दइ दे।
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बिमल रॉय के साथ काम करने के दौरान ही गुलजार की मुलाकात आरडी बर्मन से भी हुई और उन्होंने उनके साथ भी काम किया।
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उन्होंने गीत लिखने के साथ-साथ निर्देशन का काम भी किया। गुलजार ने आंधी और किरदार जैसी फिल्में डायरेक्ट की। इसके अलावा उन्होंने टीवी सीरीज मिर्जा गालिब का भी निर्देशन किया।
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एक मैकेनिक को जब बिमल रॉय ने गीत लिखने का काम दिया होगा तो उन्हें इस बात का कोई अंदाजा नहीं होगा कि एक दिन वह भारतीय सिनेमा में कई रंग भरेंगे। टूटे दिलों को उनकी शायरी और गीत सहारा देंगे। मोहब्बत की दुनिया भी गुलजार की शायरी, कविता और गीतों के बिना अधूरी ही लगेगी।

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फिल्मी दुनिया में एक नहीं बल्कि कई रंग जिए हैं गुलजार ने। वो कविता तो लिखते ही हैं, इसके अलावा वह गीतकार, डायरेक्टर भी हैं। गुलजार डायलॉग भी लिखते हैं।

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निजी जीवन में गुलजार अकेले ही रहे हैं। उन्होंने साल 1973 में बॉलिवुड अभिनेत्री राखी से शादी कर ली थी। लेकिन शादी के एक साल बाद ही दोनों अलग हो गए। गुलजार की एक बेटी भी है जिसका नाम है मेघना गुलजार।
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गुलजार को अभी तक करीब 20 फिल्म फेयर अवॉर्ड मिल चुके हैं। इनमें से 11 अवॉर्ड उन्हें बेस्ट गीतकार के लिए मिले हैं। 4 अवॉर्ड उन्हें बेस्ट डायलॉग लिखने के लिए मिले हैं। उन्हें जय हो गाना लिखने के लिए ऑस्कर अवॉर्ड से भी नवाजा गया है।
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