जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू होने के कई दिन बाद सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा कि घाटी में आतंकियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में आम लोगाें को परेशान नहीं किया जाता है। दरअसल, जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर भारतीय सेना निशाने पर है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक कश्मीर में मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है। कांग्रेस ने भी सेना पर मानवाधिकार हनन के आरोप लगाए थे।
रावत ने कहा कि सेना का मुख्य मकसद घाटी में हिंसा और अशांति फैलाने वाले आतंकियों को मार गिराना है। ऐसे आम कश्मीरियों को बिलकुल परेशान नहीं किया जाता, जो हिंसक घटनाओं में शामिल नहीं हैं। सेना सख्त नियमों का पालन करते हुए अभियान चलाती है। पीडीपी-भाजपा सरकार गिरने के बाद सूबे में सख्ती नहीं बढ़ाई गई है। सेना प्रमुख ने कहा कि आम कश्मीरियों के अनुकूल नियमों के तहत सेना अभियान चलाती है। स्थानीय कमांडर सैनिकों को अभियान चलाने के दिशा-निर्देश देते हैं। कुछ प्रायोजित रिपोर्ट्स सामने आती रहती हैं। इनमें कहा गया है कि सेना और सुरक्षा बल कश्मीर में वीभत्स अभियान चला रहे हैं। ऐसी रिपोर्ट्स पूरी तरह से गलत और सच्चाई से दूर हैं।
पत्थरबाजी बंद हो तो समृद्ध हो जाएगा कश्मीर
सेना प्रमुख ने बारामुला और आसपास के क्षेत्रों से आए छात्र-छात्राओं से बातचीत के दौरान कहा कि अगर कश्मीर में आतंकी गतिविधियों और पत्थरबाजी बंद हो जाए तो घाटी भी दिल्ली व अन्य शहरों की तरह समृद्ध हो सकती है।
रिपोर्ट को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं
जनरल रावत ने पहले भी घाटी में आम लोगों के मानवाधिकारों को लेकर आई संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट को प्रायोजित बताते हुए खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि भारतीय सेना के मानवाधिकार रिकॉर्ड के बारे में बताने की जरूरत नहीं है। सभी इस बारे में जानते हैं। कश्मीर के लोग और अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इसे बेहतर ढंग से जानता है। इस रिपोर्ट को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है।
नागरिकों के ज्यादा मरने का लगाया था आरोप
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा था कि घाटी में चलाए जा रहे सेना के अभियान में आतंकी कम और नागरिक ज्यादा मारे जा रहे हैं। आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा ने आजाद के बयान का समर्थन करते हुए कहा था कि जम्मू-कश्मीर में सेना नागरिकों को तड़पा रही है।