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इस्तेमाल हो चुके खाने के तेल से बनेगा बायोडीजल, निजी कंपनियों से होगा समझौता, लगाएंगी प्लांट

Sun, 11 Aug 2019 01:45 AM IST
Avdhesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

  • धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि कुकिंग ऑयल के अलावा बायोडीजल कई रूपों में उपलब्ध है
  • इनसे हर साल करीब 110 लीटर बायोडीजल बनाया जाएगा
  • यह व्यर्थ से धन में परिवर्तन का साधन है
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तेल
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विस्तार
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इस्तेमाल हो चुके खाने के तेल से अब बायोडीजल बनेगा। पहले चरण में देश के सौ शहरों में इसके लिए प्लांट लगेंगे। शनिवार को वर्ल्ड बायोफ्यूल डे पर सरकारी पेट्रोलियम कंपनियां इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के इस प्रोजेक्ट को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लांच किया।
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मंत्री ने बताया कि देश के सौ शहरों में लगने वाले प्लांट के लिए निजी कंपनियों से सरकारी पेट्रोलियम कंपनियां समझौता करेंगी। पहले वर्ष तेल कंपनियां बायोडीजल 51 रुपये प्रति लीटर लेंगी और दूसरे साल इसकी कीमत 52.7 रुपये लीटर होगी और तीसरे साल बढ़कर 54.5 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी।

मंत्री ने रीपर्पज युज्ड कुकिंग ऑयल (आरयूसीओ) स्टीकर और यूज्ड कुकिंग ऑयल (यूसीओ) के लिए मोबाइल ऐप भी लांच किया। इनसे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इस्तेमाल हो चुका तेल दोबारा इस्तेमाल में न आए। यह स्टीकर होटल और रेस्त्रां को अपने परिसर में लगाकर घोषणा करनी होगी कि वे बायोडीजल के लिए यूसीओ की आपूर्ति करते हैं।
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धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि कुकिंग ऑयल के अलावा बायोडीजल कई रूपों में उपलब्ध है। यह व्यर्थ से धन में परिवर्तन का साधन है। उन्होंने इस मौके पर कहा कि बायोफ्यूल डे को अब वैकल्पिक ऊर्जा दिवस के रूप में मनाया जाएगा।
 
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110 करोड़ लीटर बायोडीजल बनेगा हर साल 

देश में हर वर्ष 2700 करोड़ लीटर खाने का तेल इस्तेमाल होता है। जिसमें से 140 करोड़ का होटल, रेस्त्रां और कैंटीन से एकत्र किया जा सकता है। इनसे हर साल करीब 110 लीटर बायोडीजल बनाया जाएगा। हालांकि इस वक्त इस्तेमाल हो चुके खाने के तेल को इकट्ठा करने के लिए कोई चेन नहीं है। 

इस्तेमाल तेल से होती है बीमारी : हर्षवर्धन

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने इस मौके पर मंत्रालय के प्रयासों की तारीफ करते हुए कहा कि इस्तेमाल हो चुके तेल को दोबारा खाने में इस्तेमाल से हाइपरटेंशन, ऐथिरोस्कलेरोसिस, अल्जाइमर और लिवर से जुड़ी बीमारियां होती हैं। 
 
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