इस राखी के त्योहार पर अपने भाई की कलाई को बायोडिग्रेडेबल राखियों से सजाएं। भोपाल के 5 गांवों की महिलाओं ने मिलकर विदर्भ के कॉटन सूत एवं विभन्न फल और सब्जियों के बीजों से राखियां बनाई हैं। राखियों में इस्तेमाल होने वाले बीजों को बाद में खेतों में प्रयोग किया जा सकता है।
ये राखियां बाजार में धूम मचा रही हैं। इन राखियों में एकेए 7 और आनंद 1 नामक कॉटन सूत का प्रयोग किया गया है। मध्य प्रदेश के 5 गांव के 50 महिलाओं ने मिलकर इस राखी को बनाया है। इस राखी को सजाने के लिए मटर, तूर, मूंग आदि दालों के बीज का प्रयोग किया गया है ताकि इन बीजों का बाद में भी इस्तेमाल किया जा सके।