लोकसभा में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक पास हो गया। इसमें सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या को 30 से बढ़ाकर 33 करने का प्रावधान किया गया है। संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन मेघवाल ने कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद की ओर से विधेयक पेश किया। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस को मिलाकर 31 जज हैं। गौरतलब है कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने पीएम नरेंद्र मोदी से जजों की संख्या बढ़ाने का अनुरोध किया था।
निचले सदन में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार की भूमिका न्यायपालिका के काम में हस्तक्षेप नहीं करने की है, बल्कि सहयोग करने की है। उन्होंने कहा कि 2016 में उच्च न्यायालय में 126 न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई, 2017 में 115 और 2018 में 108 न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई और इस साल अब तक 31 न्यायाधीशों की नियुक्ति कर चुके हैं। राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) विधेयक पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का उल्लेख करते हुए प्रसाद ने कहा कि फैसले में यह कहना उचित नहीं है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में भारत की संसद का कोई प्रतिनिधि नहीं होगा।
मंत्री ने कहा कि न्यायाधीशों को विचार करना चाहिए कि उनकी जवाबदेही क्या है। प्रसाद ने कहा कि न्यायिक नियुक्ति में स्क्रीनिंग होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश अपेक्षा करता है कि न्यायपालिका में वंचित तबकों को मौका मिलना चाहिए। प्रसाद ने कहा कि हम भी चाहते हैं कि राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) पर सर्वसम्मति होनी चाहिए, लेकिन इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति फैसले में जो टिप्पणी करना है कर लें, लेकिन वो सरसरी तौर पर टिप्पणी (स्वीपिंग कमेंट) कर देते हैं वो नहीं होना चाहिए।मंत्री के जवाब के बाद सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी ।