जातिगत जनगणना के लिए नोटिफिकेशन जारी हो चुका है और इसके साथ ही जनगणना की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। जनगणना पर जनता से सवालों का दौर एक मार्च 2027 से शुरू होगा, लेकिन इसके पहले ही जातियों के मामले में बेहद संवेदनशील राज्य बिहार में विधानसभा के चुनाव इसी साल के अंत में संपन्न हो जाएंगे। मतगणना का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद बिहार पहला राज्य होगा, जहां चुनाव होंगे। ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण होगा कि इस चुनाव में जातिगत जनगणना का लाभ किसे मिलेगा?
एनडीए के पास दलित-पिछड़ी हर जाति के नेता
इस मामले में भाजपा-जदयू के पास मजबूत प्वाइंट यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी भी पिछड़ी जातियों के सबसे बड़े नेताओं के तौर पर एनडीए खेमे की अगुवाई कर रहे हैं। ये दोनों ही नेता अपने कार्यों के कारण एक बड़े वर्ग का जनसमर्थन हासिल करते हैं। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उपेंद्र कुशवाहा भी पिछड़ी जाति से आते हैं जो अपने वर्ग के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। वहीं, जीतन राम मांझी और चिराग पासवान दलित और महादलित जातियों को एनडीए खेमे में मजबूत करते हैं। सामाजिक समीकरणों को देखते हुए एनडीए जातिगत समीकरणों को साधने के मामले में मजबूत दिखाई दे रहा है।
महागठबंधन लालू के एम-वाई के भरोसे
लेकिन इसके बाद भी लालू प्रसाद यादव का एम-वाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण आज भी लालू यादव के पीछे एकजुट है। बिहार में यादव (करीब 14 प्रतिशत) और मुसलमान (17 प्रतिशत) वोट बैंक का बड़ा हिस्सा आज भी लालू-कांग्रेस के साथ खड़ा है। पिछले बिहार विधानसभा चुनावों में असदुद्दीन ओवैसी का प्रकरण देखते हुए इस बार यह वोट बैंक ज्यादा रणनीतिक वोटिंग कर राजद-कांग्रेस को लाभ पहुंचा सकता है।
भाजपा लाभार्थियों को सहेजेगी
भाजपा बिहार में लाभार्थियों को साधने की विशेष रणनीति भी बना रही है। पार्टी ने पटना में अपना चुनाव विशेष कार्यालय शुरू कर दिया है। भाजपा नेता रोहन गुप्ता इसकी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और उनके नेतृत्व में लगभग 200 कार्यकर्ताओं की टीम जल्द ही बिहार में केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ लेने वाले सभी लाभार्थियों से संपर्क करेगी और उन्हें 'प्रोत्साहित' करने का काम करेगी।
बिहार में इस बार लगभग 7.80 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। भाजपा नेताओं का दावा है कि केवल बिहार में केंद्र सरकार का लाभ उठाने वाले लोगों की संख्या दो करोड़ से अधिक हो सकती है। इसमें आयुष्मान योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, उज्ज्वला योजना, जनधन योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थी शामिल हैं। इसके अलावा बिहार में नीतीश सरकार की योजनाएं भी लोगों को एनडीए के पक्ष में मतदान करने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।
चूंकि मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के सहारे जिन 17 कामगार जातियों-वर्ग को साधने की कोशिश की थी, उनकी सबसे बड़ी आबादी बिहार में ही रहती है, भाजपा का अनुमान है कि यह वर्ग अपनी जातिगत प्रतिबद्धता की बजाय केंद्र सरकार की नीतियों के कारण एनडीए को वोट कर सकता है। यदि ऐसा होता है तो एनडीए की सत्ता में वापसी की राह आसान हो सकती है।
हर वर्ग का विकास हमारी प्रतिबद्धता: भाजपा
भाजपा प्रवक्ता अनुरुद्ध प्रताप सिंह ने अमर उजाला से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने शासनकाल के पहले दिन से ही हर पिछड़े, आदिवासी और अनूसूचित जाति के लोगों के विकास को अपनी प्राथमिकता बनाकर रखा है। केंद्र सरकार ने अपनी विभिन्न योजनाओं से इन वर्गों के लोगों का जीवन स्तर ऊपर उठाया है और उन्हें समाज की मुख्यधारा में सामाजिक-आर्थिक समानता दिलाने का काम किया है।
अनुरुद्ध प्रताप सिंह ने कहा कि उनके लिए गरीबों-आदिवासियों का विकास कोई चुनावी नारा नहीं है। यह भाजपा की सतत वैचारिक प्रक्रिया है जो सत्ता में आने पर उसकी नीतियों-योजनाओं के रूप में दिखाई दे रही है। जबकि जनता ने देखा है कि जब कांग्रेस को सत्ता मिली तो केवल एक परिवार का विकास किया गया, उसी तरह बिहार में जब-जब राजद सत्ता में आई तो केवल लालू परिवार के लोगों का विकास हुआ। उन्होंने कहा कि बिहार की प्रबुद्ध जनता इस सच्चाई को देख भी रही है और समझ भी रही है। ऐसे में वह एनडीए को सत्ता में लाने के लिए ही वोट करेगी।
सुरक्षा दे पाने में असफल रही सरकार: राजद
राष्ट्रीय जनता दल प्रवक्ता डॉ. नवल किशोर यादव ने अमर उजाला से कहा कि भाजपा और नीतीश कुमार पिछले बीस सालों से लगभग सत्ता में बने हुए हैं। वे हर बार यही सब बातें कहकर जनता से वोट लेते रहे हैं। लेकिन इसी बीच पटना से लेकर बिहार के सुदूर इलाकों में लोगों को खुलेआम गोली मारी जा रही है और लोग अपनी जान को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार को सुरक्षा न दे पाने के कारण राज्य का विकास नहीं हो पा रहा है और इसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर भाजपा और नीतीश कुमार के शासन की है। ऐसे में जनता इस बार बदलाव के लिए वोट करेगी, ऐसा उनका विश्वास है।