चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) को सूची शुद्धि का जरिया बताया। पिछले छह महीनों में 28 नई पहल, 4,719 सर्वदलीय बैठकें और 28,000 से अधिक दल प्रतिनिधियों की भागीदारी हुई। आयोग ने गैर-मान्यता प्राप्त 334 दलों को हटाया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ईसीआईनेट भी शुरू किया।
बिहार में मतदाता गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर मचे सियासी घमासान के बीच चुनाव आयोग ने दो टूक कहा कि इसका मकसद मतदाता सूची को शुद्ध करना है। आयोग ने मंगलवार को कहा कि एसआईआर से यह सुनिश्चित होगा कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से कटने न पाए और किसी अपात्र का नाम मतदाता सूची में जुड़ने न पाए।
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निर्वाचन आयोग ने पिछले छह महीने से मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए 28 नई पहल शुरू की है। चुनाव तंत्र को मजबूत करने के लिए इसमें सभी हितधारकों को शामिल किया गया। आयोग की ओर से जारी बयान के मुताबिक चुनाव आयोग ने इस दौरान 4,719 सर्वदलीय बैठकें कीं। बयान के मुताबिक इन बैठकों में विभिन्न राजनीतिक दलों के 28,000 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
इस दौरान आयोग राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय दलों के साथ नियमित संपर्क में रहा। इतना ही नहीं आयोग ने 20 बैठकें करने के बाद 334 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) को सूची से हटा दिया और लगातार छह वर्षों तक चुनाव न लड़ने के कारण 476 अन्य आरयूपीपी को सूची से हटाने की कार्यवाही शुरू कर दी है। चुनाव आयोग ने मतदाताओं और अन्य हितधारकों के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म ईसीआईनेट शुरू किया है।
बूथों पर मतदाताओं की संख्या की समिति
आयोग ने बताया कि उसने देश में अलग-अलग लोगों को एक जैसे एपिक नंबर को भी हटाया। इसके अलावा मतदान केंद्रों पर भीड़ और कतार कम करने के लिए प्रत्येक बूथ पर मतदाताओं की संख्या 1,200 तक सीमित कर दी। साथ ही मतदान केंद्र से दलों के बूथ की दूरी को भी घटा कर महज 100 मीटर कर दिया।