नीतीश कुमार सरकार ने भले ही 100 यूनिट मुफ्त बिजली देने की योजना टाल दी हो, लेकिन कांग्रेस और राजद बिहार चुनाव में मुफ्त वादों का बड़ा पिटारा खोल सकते हैं। इसमें 100 यूनिट मुफ्त बिजली देने के साथ-साथ हर परिवार की एक महिला को हर महीने 2500 रुपये देने का वादा किया जा सकता है। महागठबंधन के पिटारे में दलितों-पिछड़ों के लिए विशेष विकास योजनाएं शामिल हो सकती हैं। महागठबंधन बिहार में मुसलमानों को आरक्षण देने का वादा भी सकता है। बिहार में इसी साल के अक्तूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस तेलंगाना, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर महिलाओं को अपनी चुनावी रणनीति के केंद्र में रखकर योजनाएं बनाएगी। इसके लिए महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा करने के साथ-साथ उन्हें बसों में मुफ्त सफर सहित कई आकर्षक योजनाओं का लाभ देने का वादा किया जा सकता है। कांग्रेस को इसी तरह की योजनाओं की घोषणा करने का लाभ तेलंगाना, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में मिला था। हालांकि, यूपी में इसी तरह की घोषणा करने के बाद भी उसे सफलता नहीं मिल पाई थी।
नीतीश सरकार ने 2005 से 2020 तक के कार्यकाल में आठ लाख सरकारी नौकरियां देने की बात कही है। साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह भी घोषणा की है कि अगले पांच वर्षों के दौरान एक करोड़ सरकारी नौकरियां-रोजगार दिया जाएगा। महागठबंधन इसकी काट में युवाओं के लिए 10 लाख सरकारी नौकरी और स्वरोजगार अपनाने के लिए विशेष आर्थिक पैकेज देने की घोषणा कर सकता है।
मुसलमानों पर भी दांव खेलेगा महागठबंधन
बिहार में 17.7 प्रतिशत के करीब मुसलमानों का वोट हासिल करने के लिए कांग्रेस-राजद उन्हें सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने की घोषणा कर सकता है। इस समय बिहार में मुसलमानों को पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग के कोटे में आरक्षण मिलता है। उच्च जाति के अशराफ मुसलमानों (शेख, सैयद, पठान और मुगल) को छोड़कर पिछड़े-अति पिछड़े मुसलमान (सुरजापुरी मुस्लिम, मडरिया, मलिक, कसाई, कसाब, डफाली, भाट, मेहतर, चुड़िहार, राइन, दर्जी इत्यादि) इस श्रेणी के आरक्षण का लाभ लेते हैं। कांग्रेस-राजद इसे विस्तार देते हुए मुसलमानों के सभी वर्गों को आरक्षण देने की घोषणा कर सकते हैं।
यह विकास का युग, बिहार नहीं रहेगा पीछे: भाजपा
भाजपा नेता ऐश्वर्या ने अमर उजाला से कहा कि कांग्रेस की घोषणाएं हर राज्य में असफल साबित हुई हैं। कर्नाटक जैसे राज्यों में बड़ी-बड़ी घोषणाएं करने के बाद भी वह उसे लागू नहीं कर पाई है। कर्नाटक से लेकर हिमाचल प्रदेश तक में कर्मचारियों को वेतन देने के पैसे तक नहीं रह गए हैं। ऐसे में जनता उनके वादों पर कोई भरोसा नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां कांग्रेस अपनी हर योजना में असफल रही है, वहीं भाजपा की सरकारों ने अपना हर वादा निभाया है। यही कारण है कि भाजपा आज जनता के बीच एक भरोसेमंद पार्टी बनकर उभरी है।
उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया यह मानने लगी है कि यह भारत का समय है। आज जिस तरह भारत ने आर्थिक मोर्चे पर विश्व में अपना डंका बजाया है, दुनिया के तमाम देशों की नकारात्मक या स्थिर ग्रोथ के बीच भारत ने अपनी तेज बढ़त बरकरार रखी है, उसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकासवादी नीतियों को ही जाता है। भाजपा इन नीतियों को जनता के बीच ले जाकर जनता को अपने साथ जोड़ने का काम करती है।
बीजेपी की महिला मोर्चे की प्रमुख पदाधिकारी ऐश्वर्या ने कहा कि देश ने यह सफलता इसलिए हासिल की है क्योंकि केंद्र सरकार ने देश के विकास में हर वर्ग को हिस्सेदार बनाया है। महिलाओं, युवाओं, पिछड़े-दलित वर्गों, उद्यमियों से लेकर श्रमिकों तक सबको विकास में भागीदार बनाया गया है। यही कारण है कि हर वर्ग अपने क्षेत्र में प्रगति कर रहा है और अंततः पूरा देश विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के विकास मॉडल को ही सामने रखकर चुनाव में उतरेगी और जीत हासिल करेगी।
20 वर्ष में हर वादे को किया पूरा: जदयू
जनता दल यूनाइटेड नेता सत्यप्रकाश मिश्रा ने अमर उजाला से कहा कि विपक्ष के पास झुनझुना बजाने के अलावा और कोई काम नहीं है। राजद-कांग्रेसको बताना चाहिए कि जनता उनके किन कामों पर भरोसा करे। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता अब 20 साल पुराने लालू यादव के 'जंगलराज वाले दौर' की वापसी नहीं चाहती।
उन्होंने कहा कि बिहार की राजनीति का पिछले 20 वर्ष का रिकॉर्ड रहा है कि नीतीश कुमार ने जो भी वादा जनता से किया, उसे पूरा किया है। इसमें महिलाओं को पंचायत चुनावों में 50 फीसदी का आरक्षण देने से लेकर, उन्हें नौकरियों में क्षैतिज आरक्षण देने से लेकर शराबबंदी तक ऐसे फैसले भी शामिल हैं जिनके बारे में कहा जाता था कि कोई भी सरकार इस वादे को पूरा नहीं करेगी क्योंकि इससे उसे भारी आय होती है।
सत्यप्रकाश मिश्रा ने कहा कि जब सरकार कोई कल्याणकारी योजना लाती है तो इससे समाज के कुछ वर्गों का लाभ होता है। लेकिन इसे मुफ्त या फ्रीबीज नहीं कहा जाना चाहिए, क्योंकि यह निम्न तबकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। बिहार में सरकार ने दलितों, महादलितों, पिछड़ों और अति पिछड़ों का जीवन स्तर बेहतर बनाने के लिए तरह-तरह की योजनाएं लागू की हैं और उनका असर लोगों के जीवन में दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि इस बार भी जनता दल यूनाइटेड नीतीश कुमार के कार्यों को प्रमुखता से आगे रखते हुए चुनाव में उतरेगी और जीत हासिल करेगी।