प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बिहार के गयाजी में साफ कर दिया कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई और घुसपैठ का मामला भाजपा-जदयू का सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा होगा। केंद्र सरकार ने संसद में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्रियों के जेल जाने पर उनको पद से हटाने का कानून लाने का प्रस्ताव किया है। विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। पीएम ने विपक्ष के इस विरोध को भी जमकर भुनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि राजद-कांग्रेस इस कानून का विरोध केवल इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन्हें अपने जेल जाने का डर है।
मोदी ने बार-बार लोगों को 'लालटेन युग' में बिहार में दुर्दशा होने की बात कही। उन्होंने कहा कि लालटेन युग में बिहार की धरती लाल हो जाती थी। यह कहकर वे राजद के उसी दौर को याद दिलाने की कोशिश कर रहे थे, जब बिहार में संगठित अपराध अपने चरम पर था। नई पीढ़ी के बहुत से मतदाताओं को वह दौर याद नहीं होगा। लेकिन पीएम ने अपने भाषणों से लोगों को उसी दौर की याद दिलानी चाही। इससे साफ है कि वे अभी भी कथित जंगलराज को अपनी राजनीतिक ताकत बनाकर रखना चाहते हैं। भाजपा बिहार विधानसभा चुनावों में इसका लाभ लेने की कोशिश करेगी।
प्रधानमंत्री ने जिस तरह बिना किसी भ्रष्टाचार के लोगों को नौकरी दिए जाने का मामला उठाया, उससे भी वे राजद कार्यकाल में नौकरी के बदले भूमि लिए जाने के मामले की याद दिला रहे थे। इसके जरिए भी लोगों को यही बताने की कोशिश की गई कि राजद कार्यकाल में किस तरह भ्रष्टाचार होता था।
'वोट चोरी' को घुसपैठ से जोड़ने की कोशिश
राहुल गांधी और तेजस्वी यादव इसी समय बिहार में वोट अधिकार यात्रा निकाल रहे हैं। वे लोगों को याद दिला रहे हैं कि जनता के वोट का अधिकार छीना जा रहा है। राहुल गांधी खुलकर इसके लिए 'वोट चोरी' शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं और इसके लिए प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। अब मोदी ने इसे 'घुसपैठ' के मुद्दे से जोड़ने का प्रयास किया। उन्होंने लोगों को सावधान करते हुए कहा कि घुसपैठियों के कारण बिहार के साथ-साथ देश की सुरक्षा के सामने बड़ा खतरा पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि लोग नहीं चाहेंगे कि घुसपैठिये उनके नौकरी के अधिकार को छीन लें। कहा यही जा रहा है कि जिन लोगों के वोट काटे गए हैं, उनमें से बड़ी संख्या में ऐसे लोग ही शामिल हैं जो बिहार के स्थाई निवासी नहीं हैं। भाजपा का आरोप है कि बांग्लादेश से आए मुसलमानों को बिहार का मतदाता बनाकर राजद अपना वोट मजबूत करने का काम करती रही है।
बिहार के सीमांत इलाकों में घुसपैठ का मुद्दा काफी संवेदनशील बन चुका है। एसआईआर के कारण अब यह मुद्दा नए सिरे से चर्चा का बिंदु बन गया है। राजद एसआईआर को आम लोगों के खिलाफ बताने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा ने एसआईआर को बिहार के मूल लोगों के हित में और घुसपैठियों के खिलाफ बताने का काम कर रही है। इसका चुनावों पर असर पड़ सकता है।
विकास और जन आवास भी
हालांकि, भ्रष्टाचार के साथ-साथ एनडीए विकास और कल्याणकारी योजनाओं को भी अपनी ताकत बनाकर रखना चाहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों को बार-बार अपने कार्यकाल में बिहार के लिए किए गए कामों को याद दिलाया गया। सबसे ज्यादा जोर उन्होंने पीएम आवास पर दिया और बताया कि बिहार में लाखों परिवारों को पीएम आवास योजना के कारण अपना घर मिल सका है। नीतीश कुमार ने मुफ्त बिजली से लेकर पेंशन तक की याद दिलाई और साफ कर दिया कि अगली सरकार में भी ये योजनाएं चलती रहेंगी।