Bihar Politics: बिहार कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा
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आप बिहार की बात कर रहे हैं...आप दूरगामी परिणाम की बात कर रहे हैं...अरे, यह सरकार सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए बहुत बड़ा शुभ संकेत है और इसके परिणाम दूरगामी नहीं अगले कुछ महीने में ही दिखने लगेंगे। बस आप लोग देखते जाइए। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मदन मोहन झा से अमर उजाला डॉट कॉम ने बिहार के बदले हुए राजनैतिक घटनाक्रम पर बातचीत की, तो उनका अंदाज़ कुछ इस तरीके का ही था। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में बदली सरकार से कांग्रेस को न सिर्फ ऑक्सीजन मिलने वाली है, बल्कि आने वाले दिनों की राजनीति में उसके लिए बड़ी संभावनाएं बनने वाली हैं।
बिहार कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मदन मोहन झा फिलहाल नई सरकार में पार्टी की स्थिति और मंत्रिमंडल में शामिल होने की संभावनाओं पर कुछ भी बोलने से बचते रहे। लेकिन झा इस बात को लेकर बहुत आश्वस्त हैं कि बिहार में जो सरकार बनी है वह बहुत ही शुभ संकेतों के साथ बनी है। उन्होंने कहा कि नई सरकार सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश में एक बड़े शुभ संकेत को लेकर आई है। मदन झा कहते हैं कि यह बदलाव तो होना ही था। यह जो गठबंधन है, इसके परिणाम अगले कुछ महीनों में ही दिखने लगेंगे। इसके लिए कोई दूरगामी परिणामों की बातचीत करना और चर्चा करना बेमानी है। क्योंकि परिणाम अगले कुछ महीनों में ही दिखने लगेंगे।
मदन मोहन झा कहते हैं कि आप बिहार के राजनैतिक समीकरणों को देखिए और राजनीतिक दलों का झुकाव देखिए। आपको स्पष्ट पता चल जाएगा कि इस वक्त भारतीय जनता पार्टी बिहार में पूरी तरह से अकेले खड़ी है। उसका साथ देने के लिए कोई भी दल नहीं है। झा कहते हैं इसका मतलब एक सामान्य व्यक्ति को भी पता है। स्पष्ट है कि जनता का जनादेश नई सरकार के साथ था है और आगे भी रहेगा। क्या 2024 में सभी विपक्षियों को एकजुट करने की नींव बिहार की नई गठित सरकार के साथ पड़ गई है, इस सवाल पर झा का कहना है कि बिहार में जो स्थिति इस वक्त भाजपा की है, वही पूरे देश में अगले कुछ दिनों में होने वाली है। भाजपा के साथ न उनका कोई गठबंधन का साथी साथ रहने वाला है और न ही जनता उनका साथ देने वाली है। विपक्षी पार्टियां एकजुट होकर एक साथ आगे आएं, ऐसा सबका मानना है।
बिहार में हुए राजनीतिक घटनाक्रम के साथ ही राजनीतिक विश्लेषक भी मानने लगे हैं कि कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा मौका है। राजनीतिक विश्लेषक अरविंद मोहन झा कहते हैं कि आप इसे जेडीयू और आरजेडी के बीच का ही सिर्फ परिवर्तन मान कर मत चलिए। उनका कहना है कि कांग्रेस की भूमिका बिहार में भले ही उतनी बड़ी न हो, लेकिन राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में यह गठबंधन और कांग्रेस की भूमिका बहुत बड़ी हो जाती है। उनका कहना है कि अगर बीते कुछ समय का घटनाक्रम उठा कर देखेंगे, तो आपको लगेगा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के न सिर्फ संपर्क में थे, बल्कि दिल्ली आकर उनसे मुलाकात भी कर चुके हैं। वह कहते हैं कि यह बात अलग है कि बिहार में इस वक्त कांग्रेस का इतना बड़ा जनाधार नहीं है। लेकिन कांग्रेस को यहां से मिलने वाली बूस्टर डोज अगले कुछ दिनों और महीनों में होने वाले पहले से तय बड़े आंदोलनों और पद यात्रा में बड़ी भूमिका निभाने वाली है।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कहते हैं कि निश्चित तौर पर बिहार में जेडीयू आरजेडी गठबंधन के साथ सभी प्रमुख विपक्षी दलों को एकजुट होना बड़े शुभ संकेत देता है। उनका कहना है कि कांग्रेस तो शुरुआत से ही इस बात को लेकर सबसे आगे रही है कि समान विचारधारा वाले राजनीतिक दलों को एक साथ आगे आना चाहिए। वे कहते हैं कि बिहार में शुरू हुआ यह क्रम 2024 से पहले एक बहुत बड़े गठबंधन के तौर पर न सिर्फ सामने आएगा, बल्कि भाजपा को सत्ता से बेदखल भी करेगा। हालांकि इसके लिए क्या रणनीति और क्या राजनीतिक कदम उठाए जाने हैं, उस पर तो पार्टी आलाकमान के साथ यूपीए के घटक दलों से बैठक में चर्चा के बाद ही सब कुछ तय किया जा सकेगा।