विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए बिहार सरकार ने केंद्र से अर्धसैनिक बलों के 180000 जवानों की तैनाती की मांग की है। विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार, 1200 कंपनियां यानी 120000 जवानों की तैनाती की स्वीकृति दे सकती है। लिहाजा, इस दफा बिहार में दो चरणों में चुनाव है, इसलिए सीएपीएफ जवानों की संख्या एक लाख बीस हजार के आसपास ही रहेगी। पिछली बार कई चरणों में विधानसभा चुनाव हुआ था तो उसके चलते सीएपीएफ की लगभग 1500 कंपनियां तैनात की गई थी। ऐसे में इस बार 1200 कंपनियां ही पर्याप्त रहेंगी।
फिलहाल प्री पोल के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 500 कंपनियां, बिहार में पहुंच चुकी हैं। सीएपीएफ की कंपनियों को लोकल पुलिस प्रशासन के साथ विभिन्न क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा। निष्पक्ष चुनाव की गारंटी देने के लिए केंद्रीय बलों के जो 50000 जवान, बिहार पहुंचे हैं, उनमें सीआरपीएफ की वे 71 कंपनियां भी शामिल हैं, जिन्हें विशेष तौर पर जम्मू-कश्मीर से बुलाया गया है। चुनावी ड्यूटी पर मोर्चा संभालने वाले केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में बीएसएफ, सीआईएसएफ, एसएसबी और आईटीबीपी भी शामिल हैं।
बिहार में प्री पोल के लिए सीआरपीएफ की 121 कंपनियों को तैनात किया गया है। इनमें से 71 कंपनियां, जेएंडके से बुलाई गई हैं। चुनाव में किसी तरह की कोई हिंसा न हो, इसके लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। विधानसभा चुनाव के संवेदनशील बूथों पर कोई अप्रिय घटना न हो और बिना किसी भय के लोग चुनाव प्रक्रिया में भाग ले सकें, इसके लिए अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जा रही है।
अग्रिम तैनाती के दौरान केंद्रीय बल, बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में एरिया डोमिनेशन, विश्वास निर्माण के उपाय, फ्लैग मार्च और सर्विलांस का काम करेंगे। हालांकि प्रशासन द्वारा डिटेल डेपलॉयमेंट प्लान को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है। बिहार सरकार से आग्रह किया गया है कि वह केंद्रीय बलों के लोकल ट्रांसर्पोटेशन, लॉजिस्टिक, रहने की जगह और दूसरी आवश्यकताओं बाबत त्वरित निर्णय लें। चुनाव के दौरान सीएपीएफ की कंपनियों द्वारा किए गए सभी तरह के मूवमेंट की जानकारी प्रतिदिन, केंद्रीय गृह मंत्रालय को दी जाएगी।