पिछली बार के चुनाव परिणाम से विपक्ष को उम्मीद
बिहार के पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-राजद और वाम दलों के महागठबंधन ने एनडीए खेमे के सामने कड़ी चुनौती पेश की थी। राजद नेता यह मानकर चल रहे थे कि तेजस्वी यादव इस बार अपने बूते सरकार बनाने में सफल होंगे। लेकिन चुनाव परिणामों में भाजपा-जदयू गठबंधन ने कुछ अंतर से बाजी मार ली।
राजनीतिक विश्लेषक धीरेंद्र कुमार ने अमर उजाला से कहा कि चुनाव आयोग या ईवीएम पर बार-बार सवाल उठाना विपक्ष की एक रणनीति हो सकती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राजद नेताओं का मानना है कि इस बार भी नीतीश कुमार सरकार के पक्ष में 'बहुत कुछ' नहीं है। कई ऐसे कारण हैं जिनके कारण जनता बदलाव की ओर मुड़ सकती है। सत्ता में नीतीश का लंबे समय तक बने रहना और अपराध की कई घटनाओं ने विपक्ष को यह भरोसा दिया है कि यदि वे मुद्दों को सही से उठाते हैं तो इस बार बाजी उनके हाथ लग सकती है। उन्होंने कहा कि, ऐसे में बहुत संभावना है कि सत्ता पक्ष चुनाव में किसी तरह की गड़बड़ी कर परिणाम न बदल सके, इसके लिए अभी से दबाव की रणनीति अपनाई जा रही है।
अपनी हार सामने देख अभी से बहाने खोजने लगे राहुल गांधी- भाजपा
भाजपा नेता जयराम विप्लव ने अमर उजाला से कहा कि कांग्रेस और राजद नेताओं को भी जमीन की सच्चाई का पता चल गया है। केंद्र की मोदी सरकार और बिहार की नीतीश सरकार के कामों के कारण बिहार में जो बड़े-बड़े बदलाव हुए हैं, उसे देखते हुए जनता ने यह तय कर लिया है कि विकास की इस रफ्तार को रुकने नहीं दिया जाएगा। यही कारण है कि राहुल गांधी जैसे नेता हारने के पहले ही बहाने तलाशने लगे हैं।
विप्लव ने कहा कि इसी चुनावी मशीनरी में कांग्रेस ने हरियाणा, तेलंगाना और कर्नाटक चुनावों में जीत हासिल की थी। तब उसने इस जीत को अपने नेता राहुल गांधी की जीत बताया था, लेकिन जब महाराष्ट्र या हरियाणा में उनकी हार होती है तो वे हार की जिम्मेदारी लेकर कुछ करने की बजाय बहाने तलाशने में जुट जाते हैं। उन्होंने कहा कि पूरा देश इस प्रक्रिया को देख रहा है और राहुल गांधी ने बार-बार चुनाव आयोग पर सवाल उठाकर अपनी विश्वसनीयता खत्म कर ली है। भाजपा नेता ने दावा किया कि इस बार भी बिहार में एनडीए की पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी।