अगर इन छोटे दलों का इस चुनाव में प्रभाव बढ़ा तो इसका घाटा सीधे सीधे राजद की अगुवाई वाले विपक्षी महागठबंधन को उठाना होगा। दरअसल, एआईएमआईएम की निगाहें राज्य के सीमांचल इलाके पर है, जहां कई सीटें न सिर्फ मुस्लिम-बहुल हैं, बल्कि कई सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में है।
इसके अलावा जाप का प्रभाव कोसी क्षेत्र के यादव मतदाताओं में माना जाता है। मुस्लिम और यादव बिरादरी का बड़ा हिस्सा बीते तीन दशकों से राजद के साथ रहा है। इसके अलावा अगर यशवंत सिन्हा 16 दलों का तीसरा मोर्चा खड़ा कर पाए तो यह मोर्चा सरकार से नाराज मतों का बंटवारा ही करेगा।
अस्तित्वहीन हो चुके हैं वाम दल
बीते चुनाव में सीपीआईएमएल-लिबरेशन, भाकपा, माकपा, फारवर्ड ब्लॉक सहित छह वाम दलों ने राज्य की सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। हालांकि इसमें सिर्फ सीपीआईएमएल लिबरेशन के हाथ ही तीन सीटें आई। वाम गठजोड़ में शामिल दूसरी कोई पार्टी खाता नहीं खोल पाई। हालांकि, वाम दलों को करीब चार फीसदी वोट जरूर हासिल हुए थे।