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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आगे है कुआं पीछे खाई

Mon, 28 May 2018 07:59 PM IST
शशिधर पाठक, अमर उजाला
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nitish kumar
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर फॉर्म में हैं। लेकिन भाजपा आलाकमान को नीतीश कुमार के इस तरह से बयानों पर कोई ताज्जुब नहीं हो रहा है। नीतीश कुमार ने पहले नोटबंदी पर अपनी राय बदली और फिर केन्द्र सरकार से मिली बाढ़ राहत सहायता पर नाराजगी जताई। इतना ही नहीं नागरिकता कानून का भी उन्होंने खुला विरोध किया था। इस विरोध में नीतीश कुमार के साथ असम में भाजपा की सहयोगी असम गण परिषद भी शामिल थी। इसके बावजूद भाजपा का शीर्ष नेतृत्व निश्चिंत है।
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह राजनीति में बेहतर तैयारी के लिए जाने जाते हैं। उनकी रणनीति पार्टी को फायदे में लाने वाली होती है। सूत्र बताते हैं कि बिहार को लेकर अमित शाह काफी संवेदनशील हैं। वैसे भी बिहार में जनता दल यूनाइटेड, राजद और कांग्रेस के गठबंधन का बिहार राज्य सभा चुनाव में परचम फहराना अमित शाह को याद है। हालांकि नई सरकार के गठन के कुछ समय बाद नीतीश कुमार की पार्टी जद (यू) ने अपने सहयोगियों से नाता तोड़ लिया था। इस समय बिहार में भाजपा और जद (यू) के गठबंधन की सरकार है।

नीतीश को तय करना पड़ेगा

नीतीश कुमार के बारे में आम है कि वह अपनी छवि को लेकर कुछ ज्यादा ही संवेदनशील हैं। बिहार में एक बार फिर उनकी छवि को झटका लग रहा है। वह मुख्यमंत्री के तौर पर अपने इस कार्यकाल में बिहार में कुछ खास नहीं कर पा रहे हैं। ऊपर से भाजपा नेताओं की करतूत ने भी कई बार बिहार सरकार के प्रशासनिक मामले को आईना दिखाया है। बिहार की राजनीतिक समझ रखने वाले लोगों के अनुसार नीतीश कुमार की धर्म निरपेक्ष छवि को गहरा झटका लग रहा है। ऐसे में नीतीश दबाव बनाने की मंशा से अपने बयानों में पैना पन ला रहे हैं। वहीं संघ और भाजपा के नेताओं ने बिहार में अपनी जमीन मजबूत करनी शुरू कर दी है।
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बिहार की राजनीति के पारखी शिवानंद तिवारी नीतीश कुमार की बेचैनी को समझ रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता के अनुसार यह तो होना ही था। नाम न छापने की शर्त पर सूत्र का कहना है कि नीतीश स्टैंड बदलने में माहिर हैं। इसलिए अभी कुछ कहना ठीक नहीं है। इस बारे में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के करीबियों का कहना है कि बिहार को लेकर भाजपा गठबंधन धर्म निभा रही है।

रहा सवाल नीतीश कुमार का, तो यह उन्हें तय करना है कि उनके लिए बड़ी परेशानी आखिर क्या है, भाजपा या फिर राजद और कांग्रेस गठबंधन? सूत्र का कहना है कि यह नीतीश की मजबूरी है कि वह कम परेशान करने वाले के साथ बने रहें। जहां तक भाजपा का प्रश्न है तो वह नीतीश कुमार की मंशा को केन्द्र में रखकर अपना राजनीतिक हित नहीं छोड़ेगी।

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