बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज सीतामढ़ी विधानसभा सीट की बात करेंगे। इस सीट पर 2020 में भाजपा के मिथिलेश कुमार को जीत मिली थी।
बिहार विधानसभा चुनावों में तारीखों के इंतजार से ज्यादा इंतजार सीट बंटवारे को लेकर हो रहा है। सियासी खींचतान के बीच अमर उजाला की बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज सीतामढ़ी विधानसभा सीट की बात।
पहले जानते है सीतामढ़ी सीट के बारे में
बिहार के 38 जिलों में से एक सीतामढ़ी जिला भी है। जिले में कुल आठ विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें रीगा, बथनाहा (एससी), परिहार, सुरसंड, बाजपट्टी, सीतामढ़ी, रुन्नीसैदपुर, बेलसंड विधानसभा सीटें शामिल हैं। सीतामढ़ी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र सीतामढ़ी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। इस लोकसभा क्षेत्र में कुल छह विधानसभा सीटें आती है, इसमें बथनाहा (एससी), परिहार, सुरसंड, बाजपट्टी, सीतामढ़ी और रुन्नीसैदपुर शामिल हैं। सीट पर पहली बार 1952 में चुनाव हुए थे। इस सीट ने 1990 तक अलग-अलग पार्टियों को जीतने का मौका दिया। 1995 के बाद यहां हुए सात में छह चुनाव भाजपा के नाम रहे।
1952 में सबसे पहले सोशलिस्ट पार्टी को जीत
1952 में सीतामढ़ी सीट पर सबसे पहले चुनाव हुए थे। तब इस सीट पर सोशलिस्ट पार्टी के दामोदर झा को जीत मिली थी। उन्होंने कांग्रेस के रमेश ठाकुर को 1228 वोट से हरा दिया था। 1957 और 1962 में इस सीट पर चुनाव नहीं हुए। इसके बाद 1967 से सीट पर वापस चुनाव होने लगे।
1967 में कांग्रेस को मिली जीत
1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट पर जीत दर्ज की। कांग्रेस के के. साही ने निर्दलीय उम्मीदवार एमपी सिंह को 6062 वोट से हरा दिया था।
1969 में श्याम सुंदर दास जीते
इस चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के श्याम सुंदर दास को जीत मिली थी। उन्होंने भाकपा के राम स्वरूप सिंह को 992 वोट से हरा दिया था।
1972 में भाकपा को जीत
भाकपा के राम स्वरूप सिंह जो पिछले चुनाव में हार गए थे, इस चुनाव में उन्हें जीतने का मौका मिला। उन्होंने कांग्रेस ऑर्गनाइजेशन के राम सागर प्रसाद यादव को 5989 वोट से हरा दिया था।
1977 में कांग्रेस को मिली जीत
इस चुनाव में कांग्रेस के राम सागर प्रसाद यादव जीते। पिछले चुनाव में उन्होंने हार का सामना किया था। उन्होंने जनता पार्टी के रामस्वार्थ राय को 10759 वोट से हरा दिया था।
1980 में फिर एक बार कांग्रेस को जीत मिली। कांग्रेस (आई) को इस चुनाव में जीत मिली थी। कांग्रेस (आई) के पीर मोहम्मद अंसारी ने चरण सिंह की जनता पार्टी सेक्युलर के राम स्वार्थ राय को 2705 वोट से हरा दिया था।
1985 में फिर कांग्रेस के कब्जे में सीतामढ़ी सीट गई। कांग्रेस के खलील अंसारी ने भाकपा के रामदेव सिंह को 4992 वोट से हरा दिया था।
जनता दल को मिली जीत
1990 में सीतामढ़ी सीट पर जनता दल को जीत मिली और कांग्रेस की जीत का सिलसिला थमा। जनता दल के शाहिद अली खान ने निर्दलीय उम्मीदवार हरि शंकर प्रसाद को 6086 वोट से हरा दिया था।
1995 में भाजपा को पहली जीत
इस चुनाव में सीतामढ़ी सीट पर यह भाजपा की पहली जीत थी। भाजपा के हरि शंकर प्रसाद जो पिछले चुनाव में निर्दलीय लड़ने के कारण जनता दल के शाहिद अली खान से हार गए थे ने जीत दर्ज की। भाजपा के हरि शंकर प्रसाद ने जनता दल के शाहिद अली खान को 1533 वोट से हरा दिया था।
राजद की जीत के बाद भी भाजपा का विधायक
2000 के चुनाव में राजद के शाहिद अली खान को जीत मिली थी। भाजपा के हरि शंकर प्रसाद को इस नतीजे में हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन हरि शंकर प्रसाद ने उस नतीजे को कोर्ट में चुनौती दी। शाहिद अली खान को 35 मतों से विजेता घोषित किया गया था। अपीलकर्ता ने एक चुनाव याचिका दायर की जिसमें हरि शंकर के पक्ष में डाले गए 90 मतपत्रों को गलत तरीके से खारिज करने और 50 अतिरिक्त मतपत्रों के बंडल के गुम होने का आरोप लगाया गया। अपील स्वीकार की गई और शाहिद अली खा निर्वाचन रद्द किया गया और हरि शंकर प्रसाद को सीतामढ़ी विधानसभा में विजयी घोषित किया गया।
2005 में भाजपा को मिली जीत
2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए थे। इसमें से दोनों चुनावों में भाजपा को जीत मिली थी। 2005 फरवरी में हुए चुनाव में भाजपा के सुनील कुमार उर्फ पिंटू को जीत मिली थी। उन्होंने राजद के मो. ताहिर को 23764 वोट से हरा दिया था।
वहीं दूसरी बार चुनाव 2005 अक्तूबर में हुए थे। इस चुनाव के नतीजे भी पिछले चुनाव के जैसे ही थे। भाजपा के सुनील कुमार उर्फ "पिंटू" ने कांग्रेस के मो. खलील अंसारी को 21253 वोट से हरा दिया था।
2010 में भाजपा को फिर मिली जीत
2010 में एक भाजपा के सुनील कुमार उर्फ पिंटू ने यहां जीत दर्ज करके हैट्रिक लगाई। उन्होंने लोजपा के राघवेंद्र कुमार सिंह ने 5221 वोट से हरा दिया था।
2015 में राजद को जीत
2015 में सीतामढ़ी सीट पर राजद को जीत मिली थी। राजद के सुनील कुमार ने तत्कालीन विधायक और भाजपा के सुनील कुमार उर्फ पिंटू को 14722 वोट से हरा दिया थ।
2020 भाजपा को फिर मिली जीत
2020 में भाजपा को एक बार फिर सीतामढ़ी सीट को जीतने का मौका मिला। भाजपा के मिथिलेश कुमार ने राजद के सुनील कुमार को 11475 वोट से हरा दिया था।