बिहार विधानसभा चुनाव चंद महीने दूर हैं। सियासी बिसात पर शह मात का खेल भी शुरू हो चुका है। इस चुनावी साल में अमर उजाला अलग-अलग सीरीज के जरिए बिहार की सियासत के बारे में बता रहा है। इसी से जुड़ी ‘सीट का समीकरण’ सीरीज में आज हम दानापुर विधानसभा सीट की बात करेंगे। इस सीट पर एक समय पर लालू प्रसाद यादव भी जीते थे। उसके बाद भाजपा की आशा देवी सिन्हा लंबे समय तक यहां से जीतती रहीं। फिलहाल यहां से राजद के रीतलाल यादव विधायक हैं।
पहले जानते हैं दानापुर सीट के बारे में
दानापुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र पटना जिले का हिस्सा है। यह विधानसभा पाटलिपुत्र लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंदर आती है। पाटलिपुत्र लोकसभा में दानापुर के साथ ही मसौढ़ी, मनेर, फुलवारी, पालीगंज और बिक्रम विधानसभा क्षेत्र भी शामिल हैं। 1957 में दानापुर सीट पर सबसे पहले चुनाव हुए थे।1957 में कांग्रेस को मिली जीत
1957 में दानापुर सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी। कांग्रेस को जगत नारायण लाल ने निर्दलीय उम्मीदवार राधे श्याम सिंह को 177 वोट से हरा दिया था।लगातार दो बार जीते रामसेवक सिंह
1962 और 1967 के दोनों चुनावों में रामसेवक सिंह को जीत मिली। 1962 में सोशलिस्ट पार्टी के राम सेवक सिंह ने कांग्रेस के सीता राम केसरी को 5,741 वोट से हरा दिया था।1969: कांग्रेस ने की वापसी
1969, 1972,1977 और 1980 में लगातार कांग्रेस ने ही सीट पर विजय हासिल की थी। कांग्रेस ने लगातार चार चुनाव जीते। 1969 और 1972 में लगातार दो बार कांग्रेस के बुद्ध देव सिंह ने जीत हासिल की थी। 1969 में उन्होंने संसोपा के तत्कालीन विधायक रामसेवक सिंह को 3,866 वोट से हरा दिया था। 1972 में बुद्ध देव सिंह ने सोशलिस्ट पार्टी के केशव प्रसाद को 7,307 वोट से हरा दिया था।
1977 में एक बार फिर दानापुर सीट से कांग्रेस की विजय मिली। इस बार उम्मीदवार राम लखन सिंह यादव थे। उन्होंने जनता पार्टी के छबीला सिंह को 4,697 वोट से हरा दिया था।
1980 के चुनावों में मुकाबला कांग्रेस के दो धड़ों के बीच हुआ। कांग्रेस (आई) के बुध देव सिंह ने कांग्रेस (यू) के सुख सागर सिंह को 1,970 वोट से हरा दिया था।
1985, 1990: लगातार दो बार जीते विजेंद्र राय को मिली जीत
1985 के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार विजेंद्र राय को जीत मिली। उन्होंने कांग्रेस के पृथ्वीराज सिन्हा को 12,808 वोट से हरा दिया था।2005: आशा देवी का गढ़ बनी सीट
आशा देवी भाजपा नेता सत्यनारायण सिन्हा की पत्नी हैं। 30 अप्रैल 2003 को पटना के खगौल में सत्यनारायण सिन्हा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रीतलाल यादव भी आरोपी थे। सतनारायण सिन्हा अपनी निजी गाड़ी से कहीं जा रहे थे। इस दौरान कुछ लोगों ने उनपर गोलियां चला दीं और उनकी मौत हो गई। इस हत्याकांड में चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था, उसी में दानापुर से आरजेडी के बाहुबली विधायक रीतलाल यादव थे। इसके बाद आशा देवी ने 2005 में दानापुर सीट पर चुनाव लड़ा और जीता।
2005 में भाजपा की आशा देवी ने इस सीट पर पहली बार चुनाव जीता था। इसके बाद लगातार वह चार चुनाव में उन्हें इस सीट पर जीती। 2005 में दो बार बिहार में चुनाव हुए थे। इन दोनों ही चुनावों में भाजपा की आशा देवी ने जीत दर्ज की थी। पहले चुनाव में भाजपा की आशा देवी ने राजद के डाॅ. रामानंद यादव को 7,664 वोट से हरा दिया था।
अक्तूबर 2005 के दूसरे चुनाव में भी मुकाबला पिछले उम्मीदवारों के बीच में ही था। इस बार भाजपा की आशा देवी ने राजद के रामानंद यादव को 17,162 वोट से हरा दिया था।
2010 के चुनाव में भी भाजपा की आशा देवी को ही जीत मिली थी। उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ रहे रीत लाल राय को 17,919 वोट से हरा दिया था। रीत लाला यादव ने जेल से ही 2010 का विधानसभा चुनाव निर्दलीय लड़ा था। 2015 में भाजपा की आशा देवी ने राजद के राज किशोर यादव को 5,209 वोट से हरा दिया था।
2020: रीतलाल यादव को मिली जीत
2020 में भाजपा की आशा देवी को हार का सामना करना पड़ा। राजद के रीत लाल राय ने आशा देवी को 15,924 वोट से हरा दिया। साल 2010 में रीतलाल यादव ने सत्यनारायण सिन्हा हत्याकांड में सरेंडर कर दिया था। रीतलाल के सरेंडर करने का कारण चुनाव लड़ना बताया जा रहा था। इसके बाद उन्होंने 2010 का चुनाव जेल से लड़ा। इस चुनाव में उन्हें सत्यनारायण की पत्नी आशा देवी से हार का सामना करना पड़ा। 2020 में कोर्ट ने उन्हें जमानत मिली। और वह राजद के टिकट पर विधानसभा पहुंचे। 2024 में उन्हें 21 साल तक चले सत्यनारायण हत्याकांड में निचली अदालत ने बरी कर दिया।