‘सीट का समीकरण’ सीरीज की छठी कड़ी में आज हम आपको नौतन विधानसभा सीट के बारे में बताएंगे। इस सीट पर सबसे बड़ा चेहरा पूर्व सीएम केदार पांडे हैं।
बिहार में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं। सभी पार्टियां चुनाव की तैयारियों में जुट चुकी हैं। इस चुनावी साल में अमर उजाला बिहार और बिहार की राजनीति, उससे जुड़ी घटनाओं और चेहरों के बारे में अलग-अलग सीरीज के जरिए बता रहा है। इसी से जुड़ी ‘सीट का समीकरण’ सीरीज की पांचवीं कड़ी में आज हम आपको नौतन विधानसभा सीट के बारे में बताएंगे। इस सीट से जीते चेहरों में सबसे बड़ा चेहरा पूर्व सीएम केदार पांडे का है। अभी यहां से भाजपा के नारायण प्रसाद विधायक हैं। नारायण प्रसाद नीतीश सरकार में मंत्री रह चुके हैं।
पहले जानते है नौतन सीट के बारे में
बिहार के 38 जिलों में से एक पश्चिमी चंपारण जिला भी है। यह जिला 3 अनुमंडल और 18 ब्लाक में विभाजित है। पश्चिमी चंपारण जिले में कुल 09 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें वाल्मीकि नगर, रामनगर (एससी), नरकटियागंज, बगहा, लौरिया, नौतन, चनपटिया, बेतिया और सिकटा विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। आज बात नौतन विधानसभा सीट की करेंगे। इस सीट पर 1951 में पहली बार चुनाव हुए थे।
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1951: कांग्रेस की पार्वती देवी को मिली थी जीत
नौतन सीट पर पहली बार 1951 में चुनाव हुए थे। इस चुनाव में यहां से कांग्रेस के पार्वती देवी ने जीत दर्ज की थी। पार्वती देवी ने निर्दलीय चुनाव लड़ रहे धुसूदन प्रसाद को हरा दिया था। 1951 के विधानसभा चुनाव के बाद इस सीट का अस्तित्व समाप्त हो गया। इसके बाद 1967 के विधानसभा चुनाव में यह सीट दोबारा अस्तित्व आई।
1967: केदार पांडे जीते
1967 के विधानसभा चुनाव में नौतन सीट से केदार पांडे ने चुनाव लड़ा। चुनाव नहीं लड़ा बल्कि जीते भी। इसके बाद नौतन सीट केदार पांडे गढ़ बन गई। 1967 के बाद वो लगातार यहां से जीतते रहे। 1980 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर केदार पांडे सांसद बने। उनके लोकसभा जाने के बाद उनकी पत्नी कमला पांडे को नौतन विधानसभा सीट से जीत मिली।
वकालत करते हुए आजादी की लड़ाई में कूदे केदार पांडे, 11 महीने जेल में रहना पड़ा।
केदार पांडे का जन्म 1920 में पश्चिमी चंपारण जिले में हुआ था। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से उन्होंने वकालत की डिग्री ली। वकालत की डिग्री लेने के बाद पांडे ने 1945 से 48 तक मोतिहा और बेतिया के जिला न्यायालय में वकालत की। इसके बाद 1949 में केदार पांडे पटना उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में वकालत शुरू की। केदार पांडे ने देश की आजादी की लड़ाई में भी हिस्सा लिया था। 1942 में स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया जिसके बाद 11 महीने तक जेल में रहे। निजी जिदंगी की बात करें तो 1948 में उनकी शादी कमला पांडे से हुई थी।
केदार पांडे ने 1952 में जीता था पहला विधानसभा चुनाव
1951-52 में जब आजादी के बाद बिहार में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए तो केदार पांडे बगहा सह राम नगर सीट से चुनाव लड़े और जीते। 1957 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बगहा विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की। 1957 से 1962 के दौरान की कांग्रेस सरकारों में केदार पांडे ने गृह, पुलिस, सिंचाई और बिजली के उप मंत्री के रूप में काम किया। 1962 के विधानसभा चुनाव में बगहा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई। इस चुनाव में पांडे बगल की रामनगर सीट से चुनाव मैदान में उतरे। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उन्हें स्वतंत्र पार्टी के नारायण बिक्रम सिंह ने हरा दिया।
नौतन से जीतकर तीसरी बार विधानसभा पहुंचे
1967 में नौतन विधानसभा सीट अस्तित्व में आई। उस चुनाव में केदार पांडे ने यहां से चुनाव लड़ा और जीते। इस जीत के साथ केदार पांडे तीसरी बार विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 1969, 1972 और 1977 तक लगातार वे चार बार इस सीट से जीते। 1977 की जनता लहर में उन्होंने नौतन पर कब्जा बरकरा रखा था। 1967 के चुनाव में उन्होंने सीपीआई के के.एम. शुक्ला को 10,292 वोट से हराया। 1969 में उन्होंने भारतीय जनसंघ के भवानी प्रसाद को 4,051 वोट से हराया। 1972 में एक बार फिर उन्होंने भवानी प्रसाद जायसवाल को 9,256 वोट से मात दी। इस जीत के बाद ही केदार पांडे बिहार के मुख्यमंत्री बने। हालांकि वे केवल 15 महीने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री के पद पर रह सके। इसके बाद 1973 में अब्दूल गफूर ने उनकी जगह ली।
1975 में आपातकाल लगा। इसके बाद हुए चुनाव में जनता पार्टी की जीत मिली। केंद्र की नई सरकार आने के बाद बिहार में नए सिरे से चुनाव हुए। इस विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी की प्रचंड जीत मिली। जनता पार्टी की इस प्रचंड लहर में भी केदार पांडे नौतन से जीतने में सफल रहे। उन्होंने जनता पार्टी के भवाई प्रसाद जायसवाल को 15,041 वोट से हरा दिया।
1980 से पत्नी ने जीती सीट
1980 के लोकसभा चुनाव में केदार पांडेय कांग्रेस के टिकट पर बेतिया लोकसभा सीट से जीतकर लोकसभा पहुंचे। इंदिरा सरकार में उन्हें रेल मंत्री और ग्रामीण विकास मंत्री भी बनाया गया। इसके बाद जब राज्य में विधानसभा चुनाव हुए तो यहां से केदार पांडे की पत्नी कमला पांडे को मैदान में उतारा गया। कमला पांडे ने सीपीआई के आरके द्विवेदी को 5,607 वोट से हरा दिया। 1985 में एक बार फिर कमला पांडे ने जीत दर्ज की। कांग्रेस के टिकट पर उतरीं कमला पांडे ने सीपीआई के आरके द्विवेदी को 4864 वोट से हरा दिया।
1990 के बाद कभी नहीं जीती कांग्रेस
1990 के विधानसभा चुनाव में नौतन सीट पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने जीत दर्ज की। भाकपा के रमाकांत द्विवेदी ने जनता दल के बीरबल प्रसाद को 9,166 वोट से हरा दिया था। वहीं, कांग्रेस की कमला पांडे तीसरे स्थान पर खिसक गईं। लगातार दो बार यहां से जीत चुकीं कमला अपनी जमानत भी नहीं बचा सकीं। उन्हें महज 12.66 फीसदी वोट मिले।
1995 में नौतन विधानसभा चुनाव में नौतन सीट से निर्दलीय सतन यादव ने समता पार्टी के बैद्यनाथ प्रसाद महतो को 26,952 वोट से हरा दिया था।
2000: बैद्यनाथ प्रसाद महतो जीते, हैट्रिक भी लगाई
2000 के बिहार विधानसभा चुनाव में बैद्यनाथ प्रसाद महतो पहली बार नौतन सीट से जीते। समता पार्टी के बैद्यनाथ प्रसाद महतो ने निर्दलीय उम्मीदवार अमर यादव को 23,720 वोट से हरा दिया था। 2005 में बिहार में दो बार विधानसभा के चुनाव हुए थे। दोनों ही चुनावों में बैद्यनाथ प्रसाद महतो ने यहां से जीत दर्ज की थी। अब तक समता पार्टी जनता दल यूनाइटेड बन चुकी थी। 2005 फरवरी में हुए चुनाव में उन्होंने राजद के अमर यादव को 8,342 वोट से हराया था। अक्तूबर 2005 में उन्होंने फिर से राजद के अमर यादव को 5,303 वोट से हराया।
2009 में सांसद बने बैद्यनाथ प्रसाद
2009 के लोकसभा चुनाव में जदयू ने बैद्यनाथ प्रसाद महतो को वाल्मीकि नगर सीट से उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में महतो ने जीत दर्ज की और लोकसभा पहुंच गए। उनकी जीत के बाद नौतन सीट पर उपचुनाव हुए। इस उपचुनाव में बसपा के नारायण प्रसाद को जीत मिली।
2010 के विधानसभा चुनाव में नारायण प्रसाद ने लोक जनशक्ति पार्टी से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। नारायण प्रसाद को जनता दल यूनाइटेड से चुनाव लड़ रही मनोरमा प्रसाद ने 22,764 वोट से हरा दिया।
नारायण प्रसाद की हुई वापसी
2015 में फिर से नारायण प्रसाद ने सीट पर जीत दर्ज कर ली थी। उन्होंने लोकसभा सांसद रह चुके बैद्यनाथ प्रसाद महतो को हराया था। इसलिए उनकी इस जीत को काफी बड़ा माना जा रहा था। नारायण प्रसाद ने इस बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। नारायण प्रसाद ने जदयू के बैद्यनाथ प्रसाद महतो को 14335 वोट से हरा दिया था।
2020 में मौजूदा विधायक नारायण प्रसाद को फिर से जीत मिली थी। भाजपा के नारायण प्रसाद ने कांग्रेस के शेख मोहम्मद कामरान को 25,896 वोट से हरा दिया था।